मंगलवार, 12 जनवरी 2010

श्री श्री डबल ४२० ढकोसलानन्द चप्पलखाऊ छेड़छाड़ महाराज--- कड़ी 1

आईए, अन्दर चले आईएघबराईये मत क्यूंकि यहाँ लोग खुशी ख़ुशी आते हैं और लुटवा-पिटवा कर जाते हैंयह आश्रम हैं श्री श्री डबल ४२० ढकोसलानन्द चप्पलखाऊ छेड़छाड़ महाराज काआपको बता दे कि बाबाजी सीधे बर्फ के महाद्वीप अंटाकरिटका से पधारे हैं। बाबाजी ने उससे पहले सहारा के रेगिस्तान में ५०० बरस तक तपस्या करी और सारी गर्मी अपने में समेटकर सीधे अंटा में जा पहुचेइन्ही के प्रताप से ओज़ोन परत में छेद हो गया और महाद्वीप की बर्फ भी पिघलने लगीइनकी "हवा" ने ही ग्लोबल वार्मिंग फैलाई हैं

बाबाजी हमेसा कहते हैं ---- अमीरी सत्य गरीबी मिथ्याउनके अनुसार इस दुनिया में कोई गरीब नहींयह जितने भी अपने आपको गरीब बोलते हैंजिनके बदन पर कपडे नहीं हैंहाथ में कटोरा लेकर फोटो खिचवाते हैंबाबाजी के अनुसार यह सब कामचोर हैं

बाबाजी कामचोरी के सख्त खिलाफ हैंबाबाजी सुबह ११ बजे ही उठ जाते हैंउसके उपरांत वो पॉप म्यूजिक लगा कर घंटे तक "साधना" की "आराधना" करते हैंदोपहर के खाने में वे असंतुलित आहार लेते हैंजिसमे २० अंडे, मुर्गे और बकरा होना जरुरी हैंफिर वे अपने शयन कक्ष में घंटा "विश्राम" करते हैंशाम को बजे बाबाजी वस्त्र धारण करते हैं, और प्रवचन करते हैंप्रवचन के उपरांत वे डिस्को बार जाते हैं जहाँ उन्हें अत्यधिक "शांति" की प्राप्ति होती हैंरात में वे "साधना" में लीन होकर अपनी फेरारी में वापस आते हैं

अगली कड़ी में हम आपको बाबाजी के आश्रम और प्रवचन क्रिया की बारे में बताएँगे

कैमरामन बंदचक्षु के साथ मैं आलतू फालतू ढोलक, युगक्रांति ब्लॉग के लिए

4 टिप्‍पणियां:

  1. सोच क्या रहें हैं...आपको तो अभी तक ऎसे सदगुरू का पल्लू थाम लेना चाहिए था :)

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  2. पंडित जी, बाबाजी को हमने गुरु नहीं स्वीकार किया परन्तु वो हमें शिष्य मानते हैं. हमने "बंदचक्षु" और "आलतू फालतू ढोलक" को नौकरी पर रखा हैं. वो आगे भी खबरे लाते रहेंगे. अभी बाबाजी के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं

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  3. बाबाजी के मेक अप आर्टिस्ट और टीवी प्रोद्यूसर के बारे में भी बताइये

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  4. बाबा जी की जय के सिवाय तो और क्या कहें... :)

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