बुधवार, 6 जनवरी 2010

तेलंगाना का मुद्दा

पिछले एक महीने से तेलंगाना का किस्सा मीडिया में छाया हुआ हैंप्रतिदिन धरने हो रहे हैंगाँधी के सत्याग्रह को राजनेताओ ने नए रूप में इस्तेमाल करना सीख लियाजनता को मालूम हैं कि यह सत्याग्रह नहीं बल्कि हठ हैंआंध्र प्रदेश के छात्र भी अब इस दंगल में उतर आये हैं। भाषा के आधार पर आंध्र प्रदेश के टुकड़े करने की बात करी जा रही हैंइस तरीके की "डंडा" राजनीति सही नहीं कही जा सकतीतेलंगाना के विकास की बात करने वाले राजनेता किसी भी तरीके से राज्य हासिल करने पर जुटे हुए हैंक्या एक नए राज्य का निर्माण मात्र मांग के आधार पर हो जाना चहिए? क्या दुसरे पहलुओं पर गौर करना जरुरी नहीं हैं? क्या राज्य के निर्माण से पहले सभी कोणों को जानना जरुरी नहीं हैं?
तेलंगाना विकास की दौड़ में आंध्र प्रदेश के अन्य हिस्सों से पीछे हैं, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता| तेलंगाना को हमेसा तरसाया गयातेलंगाना की प्रति व्यक्ति आय आंध्र प्रदेश के अन्य हिस्सों से कम हैंकृषि और उत्पादन के मामले में भी तेलंगाना कहीं पीछे हैंक्या राजनेताओ को तेलंगाना बनाने से पहले उसका विकास नहीं करना चहिए? अगर आपको लड़ना हैं तो विकास के लिए लड़ोअगर आप सच्चे दिल से तेलंगाना का विकास करवाना चाहते हो तो किसी बड़े प्रोजेक्ट को चलने के लिए धरना दोजाओ और सत्याग्रह करो ---- विकास का सत्याग्रह की दलगत राजनीति करोजोइंट एक्शन समिति बनाओ और सरकार को विकास के लिए प्रेरित करोतेलंगाना के पिछड़े इलाको में जाओ और काम करो

तेलंगाना के मुद्दे ने भारत के दुसरे हिस्सों में भी आग सुलगा दी हैंपश्चिम बंगाल में गोरखालैंड बनाने की मांग हो रही हैं तो कहीं पर उत्तर प्रदेश को तीन हिस्सों में बटने को कहा जा रहा हैंयह मांगे बहुत समय से दबी पड़ी थी जो तेलंगाना के हाथी की छाव में चूहों के समान फुदक रही हैंविदर्भ, बुंदेलखंड, भोजपुर जैसे राज्यों की भी मांग हो रही हैंएक समय वल्लभ भाई पटेल ने पुरे भारत का दौरा कर के रियासतों को भारत में मिलाया थाहैदराबाद और जूनागढ़ जैसे रियासतों को भारत में मिलाने के लिए सेना का भी प्रयोग करना पड़ा थाआज हम फिर से भारत को तोड़ देना चाहते हैंवो तोडना चाहे नए राज्यों के निर्माण के रूप में हो , हुआ तो तोडना ही


नए राज्यों का निर्माण कभी भी विकास की राह पर लेकर नहीं जायेगाछोटे छोटे राज्यों में आखिर कितनी विधानसभा की सीटें होंगी, ४०-९० तकहर राज्य का हाल झारखण्ड जैसा होना तय हैंकिसी भी पार्टी से विधायको का छोटा सा हिस्सा भी अगर टूट कर दूसरी पार्टी में मिल जायेगा तो सरकार का गिरना तय हैंआज तक झारखण्ड स्थिर सरकार के लिए तरस रहा हैंइससे उपद्रवी तत्वों को भी अपना मकसद साधने का मौका प्राप्त होता हैंझारखण्ड नक्सलवाद से ग्रसित हैंविकास की गाड़ी पीछे चली गयी हैं

तो भाई लोग, देश को छोटे छोटे राज्यों में बाटने की बात मत कीजियेविकास की बात कीजियेजिस "एकता में अखंडता" के नारे को हम विश्व के मंच पर पिछले ६३ सालो से गा रहे हैं उसकी लाज रख्यिएअंत में इतनी ही आशा हैं कि तेलंगाना के वासियों को विकास की नयी सुबह जल्द देखने को मिलेरूप कोई भी हो, सुन्दर होना चहिए

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