मंगलवार, 12 जनवरी 2010

मैं कृष्ण हूँ आज के युग का, गीता के उपदेश नहीं सुनाऊंगा

गाँधी,शास्त्री,नेहरु और वल्लभ जैसे होते थे राजनीति के गौरव
पांडव अब बहुत कम बचे हैं, राजनीति में घुस आये कौरव

धृतराष्ट्र बनी बैठी हैं जनता, बस हाहाकार मचाती हैं
अर्जुनो का वध जब होता, मूक बधिर हो जाती हैं

महाभारत की इस भूमि पर युगक्रांति को लाना हैं
बिस्तरों में सोये हुए हर युवा को जगाना हैं

मैं कृष्ण हूँ आज के युग का, गीता के उपदेश नहीं सुनाऊंगा
स्वयं गांडीव उठा कर, युद्ध में उतर जाऊँगा

©Yashwant Mehta


2 टिप्‍पणियां:

  1. आगे बढ़ो वीर..गांडीव उठाओ..हम तुम्हारे साथ हैं.

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  2. kavita ke bhav theek lage bandhu parantu ......
    ' shashtree jee ke sath aur to kuchh theek hain lekin ' pandit nehru ?

    ' lohiya ' padh len .

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