शनिवार, 23 जनवरी 2010

...आत्महत्या करने से बेहतर हैं लड़ कर मरो....

आत्महत्या करना तो लगता हैं फैशन बन चूका हैं। रोज अख़बार में १-२ खबरे मिल ही जाती हैं। इन्टरनेट पर भी आत्महत्या के तरीके उपलब्ध हैं जिनका प्रयोग करके बच्चे और युवा अपनी जीवन लीला समाप्त कर रहें हैं। हर साल कितने ही किसान भी आत्महत्या कर लेते हैं।

माना कि यह जीवन कठिन हैं। रास्ते बहुत टेढ़े हैं। मंजिलें इतनी आसानी से नहीं मिलती। परन्तु इसका यह अर्थ नहीं कि जीवन ही समाप्त कर लिया जाएँ। ऐसें भी हजारो लोग हैं जो भयानक बीमारियो से जूझ रहें हैं, मौत सर पर तलवार की तरह लटकती रहती हैं। पर फिर भी वो लड़ते हैं और मौत को हराते हैं। उनमे जीवन को जीने की इच्छा निरंतर बलवती होती रहती हैं।

परेशानी कोई भी हो, इस संसार में उसका हल हैं। जीवन को यू मत ख़तम करो। आत्महत्या हैं बेहतर हैं लड़ कर मरो।

5 टिप्‍पणियां:

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  2. आत्महत्या से बेहतर बहुत कुछ हैं। इसमें से एक है कि किसी महाभ्रष्ट को गोली या बम से उड़ाकर मरें।

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