गुरुवार, 14 जनवरी 2010

आनंदीबाई जोशी ---- भारत की प्रथम महिला डॉक्टर ---भाग १

आप में से कितने लोग आनंदीबाई जोशी को जानते हैं? क्या आप भारत की प्रथम महिला डॉक्टर का नाम जानते हैं? अब तो आप जान ही गए होगे कि आनंदीबाई जोशी कौन हैं। भारत की प्रथम महिला डॉक्टर। ३१ मार्च, १८६५ को पुणे में एक धार्मिक हिन्दू ब्रहामण परिवार में एक कन्या ने जन्म लिया। नाम रखा गया यमुना। यमुना के पिता गणपत राव जोशी अमीर जमींदार थे। डाक विभाग में कार्यरत गोपालराव जोशी उनके पड़ोस में रहने आये। गोपालराव की संस्कृत पर बहुत अच्छी पकड़ थी ।उनके संस्कृत ज्ञान से प्रभावित हो गणपत राव ने उनको यमुना को संस्कृत पढ़ने के लिए कहा। तीन वर्ष तक यमुना गोपालराव से शिक्षा प्राप्त करती रही। इस बीच गोपाल राव का तबादला अलीबाग़ कर दिया गया। यमुना ने भी उनके साथ चलने की जिद करी। बेटी की शिक्षा के प्रति लगन देखकर गणपत राव ने यमुना को उसकी नानी के साथ अलीबाग भेज दिया। एक वर्ष बाद जब गोपालराव का तबादला कोल्हापुर हुआ तो यमुना और उनके विवाह की बात हुई।

९ वर्ष की आयु में यमुना का विवाह गोपालराव जोशी के साथ हुआ। गोपालराव जोशी एक विधुर थे और यमुना से उम्र में २० वर्ष बड़े थे। डाक विभाग में कार्यरत गोपालराव जोशी नारी शिक्षा और सामाजिक सुधार के कट्टर समर्थक थे। उन्होंने यमुना से विवाह करने से पहले यमुना के पिता के सामने शर्त रखी कि विवाह के बाद भी यमुना की शिक्षा चलती रहेगी। गोपाल राव जोशी ने यमुना का नाम बदल कर रख दिया --- आनंदी, और यमुना बन गयी आनंदीबाई जोशी।

१४ वर्ष की उम्र में आनंदी ने एक लड़के को जन्म दिया। परन्तु यह ख़ुशी ज्यादा दिन साथ नहीं रही और मात्र १० दिन बाद ही शिशु ने दम तोड़ दिया। इस घटना से आनंदीबाई जोशी के ह्रदय को गहरा आघात लगा। उनको लगा की बेहतर चिकित्सा न मिल पाने के कारण उनके पुत्र का देहांत हुआ और उन्होंने फैसला कर लिया कि वे स्वयं डॉक्टर बनेगी। जब उन्होंने अपने निर्णय से गोपालराव जोशी को अवगत कराया तो गोपालराव ने सहर्ष अनुमति दे दी।

परन्तु क्या यह इतना आसान था? उस समय में नारिया परवश होकर अपना जीवन बिता रहीं थी। सदियों पुराने बन्धनों और कुरीतियों से जकड़े हुए समाज में नारी की भूमिका मात्र घर की चारदीवारी तक सिमित थी। शिक्षा, साहित्य, कला आदि में नारी की उपस्थिति नगण्य थी, उस समय एक नारी के चिकित्सक बनने का फैसला हिन्दू संगटनओ और समाज के ठेकेदारों को अच्छा नहीं लगा।


.....आगे जारी रहेगा।

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