शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर

कैसे कैसे घुस गए राजनीती के अन्दर
बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर

गंगा को बना डाला हैं काला समंदर
आगे से राम जी पिछवाड़े से माल अन्दर
बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर

देश तोड़ने पहुच जाते जंतर मंतर
रासलीला रचते प्यारे भयंकर
बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर

आम जनता नाचे बनके गोपिचंदर
गाढ़ी कमाई पहुचे इनकी जेब के अन्दर
बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर


दलबदलू नमकहरामी चर्बी के टेंकर
रेगिस्तानी बुद्धि से झाडे फिलोसफी जमकर
बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर


गाँधी बप्पा के थे सिर्फ तिन बन्दर
आज देखो इनके देखो प्रकार खुद गिनकर
बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर


चाहू तो लिख तो पोथियाँ तुमपर
पर तुम इतने से के ही लायक हो कंकर पत्थर
बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर

खुद को सुधार लो वक़्त पर
नहीं तो पिटेगी एक दिन जनता तुम्हे सड़क पर
बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर


और इस रचना के कॉपी रिट , टंगे मेरी खिड़की पर
छापना हो जिसको, छापे खुलकर
नहीं लेकर जायेंगे तुमको किसी कोर्ट के अन्दर
छापना तो हमारा नाम देना वहां पर
नहीं तो अगली कविता कास देंगे तुम पर

सावधान होशियार खबरदार
बेशरम लाल भगंदर वाले बन्दर




4 टिप्‍पणियां:

  1. वाह क्या भिगो भिगो कर जूते मारे हैं बधाई इस साहस के लिये

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  2. सभी बड़ो को सादर चरण स्पर्श और स्नेह के लिए तहे दिल से धन्यवाद्। आप सबकी छाया में आने का सुअवसर मिला बहुत हर्ष हुआ। हिंदी ब्लॉग जगत में आये हुए अभी मात्र ५ दिन ही हुए हैं। काफी ज्ञान भरा पड़ा हैं हिंदी ब्लॉग जगत में। बुद्धिजीवियो और रचनाकारों को ब्लॉग जगत में सक्रिय देखकर आन्नद की प्राप्ति होती हैं। आशा करता हूँ कि सभी का स्नेह निरंतर इस नए ब्लोग्गर पर बरसेगा।

    यशवंत मेहता

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