शनिवार, 23 जनवरी 2010

...और छुट गयी मास्टरी....१

दो साल पहले ट्यूशन पढ़ाता था। जैसे ही कॉलेज में दाखिला लिया तो कुछ बच्चो को पढ़ाने का ऑफर मिला। दो-चार महीने तो बस युहीं मजे में गुजार दिए। एक महीने मेरे पास १५०० रूपये आये। आज तक अट्ठनी नहीं कमाई थी, कुछ रूपये हाथ में आये तो पता लगा कमाना किसे कहते हैं। कुछ दिन तो ऐसा लगा कि मानो मैं दुनिया का सबसे मेहनती आदमी हो गया। पर माया हैं अपना असर तो दिखाएगी। माया को महाठगनी भी कहा गया हैं। मेरा नाम एक राजा के ऊपर रखा गया हैं सो मैं भी राजा हो गया । पनवाड़ी तो मुरीद हो गए मेरे, मीठा पान और सिगरेट की डिब्बियां और साथ में थोड़ी बकवास भी। किताबें पढने का शौक भी लगा। अन्दर सोया कवि भी जाग उठा। मुहब्बत किसी से न थी पर हालत महबूब सी थी। रात को चाँद हसीं नजर आता था और सड़क पर चलती हर लड़की खुबसूरत लगती थी। सब रूपये का असर था। थोडा दानी भी हो गया था सो चलते फिरते एक-दो रूपये किसी भिखारी को दे ही देता था। बस में चलना अब अच्छा नहीं लगता था सो मोटरसाइकिल भी खरीद डाली।


पहले तो छोटी क्लास्सेस के बच्चो को पढ़ा रहा था। कुछ आमदनी और बढ़ी तो एक सिग्न बोर्ड बनवा कर घर के बाहर टांग दिया। बाहर बोर्ड क्या टंगा बड़ी कक्षा के बच्चो ने आना शुरू कर दिया।

मेरा प्रमोशन हो गया ,अब ग्यारवी-बाहरवीं के बच्चे मेरे से गणित पढने लगे थे। रूपये भी अच्छे देते थे और समय और दिमाग भी कम खाते थें। कभी कभी खिलाते पिलाते भी थे और खाते पीते भी थे। दिन में कॉलेज में पढाई और शाम को घर में कोअचिंग चलाना बस यही थी ज़िन्दगी उन दिनों। मान-सम्मान खूब मिलता था, अगर किसी गली से गुजरो तो दो-चार सलाम भी मिल जाते थे। सीना गर्व से फूल जाता था। प्यार के बल पर भूतो को भी पढना सिखा दिया था। हाँ कुछ ऐसे भुत थे जो न लातो से मानते थे न बातों से। ऐसे भूतो को मैं दूर से ही राम-राम कह देता था। आखिर गुणवत्ता का सवाल जो था। बच्चे बढे तो जगह बधाई। कुर्सियां और बोर्ड भी ख़रीदा। इधर बच्चे बढे और उधर पुराने बच्चो के माँ-बाप की शिकायतें ओर नखरे भी।



कईं माँ-बाप आते और बहस करने लग जातें, नंबर कम आते बच्चे के दोषी बन जाता मैं दिन भर बच्चा टीवी के आगे बैठा रहें, पार्क में क्रिकेट खेलता रहें या दुकान पर बैठ कर सामान बेचता रहें, इससे उनको कोई सरोकार न था उनके अनुसार अगर बच्चा दो घंटे कोअचिंग में आता हैं तो उसके नंबर आने ही चाहिए

आगे जारी रहेगा ......

1 टिप्पणी:

  1. Sahab jee
    Mehnat to rang laayegi ek din
    chhati ko garv se phulate rahiye
    master sahab ko salam sab karenge
    students ke saath maa baap ko bhi
    padhate rahiye.

    Aapke jaisa kuchh-kuchh mera bhi haal raha hay.
    Aapne mere dil ki baat kahi hay.

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