शनिवार, 9 जनवरी 2010

डॉ वेंकी रामकृष्णन

डॉ वेंकटरमण रामकृष्णन वेंकी को आज कौन नहीं जानतावडोदरा के बालिका विद्यालय से अपनी शिक्षा की शुरुआत करने वाले श्री रामकृष्णन ने बायोकेमिस्ट्री में उल्लेखनीय योगदान दिया हैंयह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि केमिस्ट्री के लिए २००९ का नोबेल पुरुस्कार पाने वाले डॉ साहब ने भोत्तिकशास्त्र में पीएचडी करी हैंकूट कूट कर सादगी से भरे हुए डॉ रामकृष्णन में डॉ कलाम जैसे विनम्रता के दर्शन होते हैंज्यो ही उनके नोबेल जीतने की खबर आई, दुनिया भर से लोगो ने उन्हें बधाई सन्देश भेज कर उनका मेल बॉक्स भर दियाउन्होंने इस बात पर थोडा सा असंतोष जाहिर कियांउनके अनुसार नोबेल प्राप्त कर लेने से कोई वैज्ञानिक महान नहीं हो जाता बल्कि ऐसे भी कई वैज्ञानिक हैं जिनको अभूतपूर्व योगदान के बाद भी सम्मानित नहीं किया गयाआज जिनके भारत आने मात्र से मीडिया खबरों का अम्बार लगा देता हैं, वे पिछले कईं वर्षो से मेहमान शिक्षक के रूप में भारतीय विज्ञानं संसथान बंग्लुरे आते रहें हैं

अभी गए मंगलवार डॉ साहब ने संसथान में अपने विचारो को सबके सामने रखाउनके अनुसार विज्ञानं को प्रकाशित रिसर्च पेपरों की संख्या से नहीं मापा जाना चाहिएभोतिक शास्त्र से केमिस्ट्री में आने के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इस बदलाव का कारन था --- ऊच कोटि के वैज्ञानिको का साथऊच वैज्ञानिक अपने रिसर्च पेपरों के बजे समझ के विकास पर ध्यान देते हैंउनका मुख्या काम विज्ञानं की गुणवता को बढाना होता हैं

भारत को प्रतिभाओ का देश बताते हुए वे भारत लौटने के लिए कह देते हैंआखिर इस ना के पीछे जो कारन हैं वो शायद भारत में काम करने वाले वैज्ञानिको से बेहतर कोई नहीं बता सकताआज भी भारत रिसर्च के फिल्ड में अन्य देशो से पीछे हैंकारन किसी से नहीं छुपे हैं

अपने आप को मात्र राइबोसों का जानकर बताते हुए डॉ रामकृष्णन नवयुवा वैज्ञानिको से नोबेल जीतने को अपना सपना बनाने की जगह रिसर्च में मन लगाकर काम करने का आग्रह करते हैंडॉ रामकृष्णन आज अनेको के लिए प्रेरणा का श्रोत बन चुके हैंयह नोबेल परुस्कार विजेता कभी मेडिकल और इन्जिनीरिंग की परीक्षायों में असफल हुआ थाकहा भी जाता हैं --- जो होता हैं अच्छे की लिए होता हैं

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