सोमवार, 25 जनवरी 2010

मुझे निबंध वाला देश चाहिए

कल २६ जनवरी हैं। बचपन में अध्यापक लोग इस अवसर पर निबंध लिखने को दे देते थे। ३-४ किताबे से पढ़कर एक निबंध तैयार हो जाता था और अध्यापक के सामने पहुच जाता था। अक्सर वो पढ़कर खुश हो जाते थे। निबंध की ताकत उसके चिंतन-प्रधान दृष्टिकोण में होती हैं परन्तु यह दृष्टिकोण पिछले ६० सालो से निबंध में ही भूमिका लिख रहा हैं।
अब कब तक इंतजार करूँगा मैं उस "निबंध वाले देश" का ,जो निबंध में बहुत ही खुबसूरत नजर आता हैं।
मुझे निबंध वाला देश चाहिए............कोई दे सकता हैं?????

एक आम नागरिक

4 टिप्‍पणियां:

  1. निबन्ध का महत्व अपार है। कविता उसका मुकाबला नहीं कर सकती; और आधुनिक कविता (कचड़ा) तो कभी नहीं।

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  2. जिस देश का वर्णन निबंध में हो, वह न होने से भी चलेगा.वैसे निबंध वाला देश उसे भी कह सकते हैं जिसके नागरिकों को निबंध लेखन में उलझा दिया गया है.

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  3. निबंध वाला देश आँख में जगमगाहट पैदा करने के लिए होता है बस!!

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