बुधवार, 27 जनवरी 2010

बात हमे भी किसी की बुरी लगी पर हम पिचकारी नहीं चलाते

चाय समोसे और यह ब्लॉग दुनिया। मजा आ जाता हैं। दिन बीतने के बाद जब शाम को यहाँ आकर बैठो तो चाय और समोसे का मजा दस गुना हो जाता हैं। तरह तरह के ब्लॉग हैं। पोस्ट संग्रहकर्ता के रूप में ब्लॉग वाणी का जवाब नहीं। "आज की हलचल" में बेहतरीन से लेकर अच्छी पोस्ट पढने को मिल जाती हैं। भैया हम बकवास किसी को नहीं कहेंगे क्यूंकि सब अपने दिल की लिख रहे हैं।

दंगल और अखाड़े भी चल रहे हैं। पोस्टो और टिप्पणियों से एक दुसरे के बाल नोचे जाते हैं। खैर चलता हैं क्यूंकि अगर यह सब नहीं होगा तो ब्लॉग दुनिया नीरस हो जाएगी। जीवन में जब हम सारे रंग देखते हैं तो यहाँ क्यूँ नहीं देखे। रंग-रस के बिना तो ब्लोगिंग में मजा ही नहीं रहेगा।

वैसे अब होली आने वाली हैं जरा रंग यहाँ भी चल जाये तो अच्छा ही लगेगा पर भैया रंग चलते हुए ध्यान यह रखना की रंग कहीं सामने वाले की आंख में ना चला जाये। बड़ी जलन होती हैं बाबु।

बात हमे भी किसी की बुरी लगी पर हम पिचकारी नहीं चलाते। बेहतर हैं कि चुपचाप अपना लेखन किया जाये।

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