गुरुवार, 28 जनवरी 2010

इन हादसों की काली छाया "अतुल्य भारत" अभियान पर पड सकती है.

अतिथि देवो भव:
भारत में अतिथि को भगवान का रुप बताया जाता है. हमारी प्राचीन इतिहास में ऐसे अनेको उदाहरण है जब अतिथि की रक्षा के लिये व्यक्ति और समुदायो ने अपना सर्वस्व दांव पर लगा दिया. गोवा में ९ वर्ष की रुसी बच्ची के साथ बलात्कार की घटना से भारत की छवि को धक्का लगा है.
इससे पहले भी गोवा, राजस्थान ,दिल्ली तथा अन्य पर्यटन स्थलो पर विदेशी मेहमानो के साथ बलात्कार और दुरव्हवार की घटनायें हुयी है.

इन हादसों की काली छाया "अतुल्य भारत" अभियान पर पड सकती है. विदेशी मेहमानो को भारत लाने में इस अभियान की उल्लेखनिय भूमिका रही है. विदेशी मेहमानो के भारत पर्यटन से हमारी अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भन्डार में बढ़ॊतरी होती है. ऐसी घटनायें "अतुल्य भारत" अभियान के एकदम खिलाफ़ है.

अगर हम पर्यटन को बढाना चाहते है तो विदेशी मेहमानो की सुरक्षा हमारा प्रथम कर्तव्य है. ये घटनायें सुरक्षा व्यवस्था के ढिलेपन को जगजाहिर करती है. विदशी मेहमानो की सुरक्षा के प्रति ऐसी लापरवाही शर्मनाक है. अगर सरकार ने इस मामले में सख्त कदम उठाने में देरी करी तो पर्यटन उद्योग को खमियाजा भुगतना पड़ेगा. विदेशी मेहमानो से जुडे कानूनी मामलो की कारवाही भी तेजी से होनी चहिये. कुछ समय पहले राजस्थान की फ़ास्ट ट्रेक अदालत ने विदेशी महिला से जुडे मामले मे मात्र ६ महीने में फ़ैसला सुनाया था.

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