शुक्रवार, 29 जनवरी 2010

सस्ते शेर शराब की बोतल से......

य़ॆ आग सीने मे रोज भड़कती है
शराबी तड़पते है जिस दिन शराब नही मिलती है
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देखो महबूब के गम वो बोतल पर बोतल पिये जा रहे है
फ़्री की मिल रही है सो हम भी उनका साथ दिये जा रहे है
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कुछ बन्धु पिने के बाद बहुत बुद्धिमान हो जाते है
राजनिति और दर्शन, सिर्फ़ अग्रेंजी में सुनाते है
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याद है वो दिन जब पहली बार तुझे लबों से लगाया
अब्बू पिकर बोले उस दिन, लगता है शराब मे किसी ने पानी मिलाया
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