बुधवार, 13 जनवरी 2010

पापा और पप्पू का आधुनिक संवाद

पप्पू की जब उम्र हुई इक्कीस
पापा जमकर निकलने लगे खीस
पप्पू समझे, क्यूंकि पापा कमाए घिसकर हड्डिया
और हम उड़ाते मटन-मुर्गा पहनकर विदेशी चद्दीयाँ
शायद इसलिए पापा परेशान हैं

शाम को पापा ने पव्वा लगाया
हुकुम फ़रमाया, पप्पू को बुलाया
क्यूँ बेटा पप्पू
जिंदगी को लेकर तुमने क्या सोचा हैं?
मोहब्बत की पिच पर
लगाया कोई चोक्का-छक्का हैं ?
पप्पू बेटा ठनक गए
लगा पापा पीकर सनक गए


पापा बोले
बेटा जम कर चढ़ी हैं
पर समझ अभी भी खड़ी हैं
तुम पर उस "भ्रमचारी" गुरु का प्रभाव हैं
तुम्हारी जिंदगी में प्रेम का अभाव हैं
खानदान का नाम मत गिरा
जल्दी से दो चार सुंदरिया पटा
तेरी उम्र में हमने
रिकॉर्ड कायम किया था
शादी से पहले ही
सारा काम किया था
हम चार बार हवालात गए थे
तदुपरांत कन्या वाले सभी पडोसी भाग गए थे



पप्पू बोला

आज तक आपको लेकर हमारी गलत सोच थी
लगता था
मम्मी के आतंक राज में आपकी जिंदगी
तन्हाई--कोच्क्रोच थी
अब सुनिए हमारी कहानी
हम मस्ती से काट रहे हैं जवानी
दूर दूर तक लडकिया हमारी दीवानी हैं
चुम्बनों के मामले में हम इमरान हासमी हैं
आप तो मुर्खानंद निकले
हर बार हवालात गए
हम तो हर केस से
४००-५०० में निपट गए
आखिर आपकी औलाद हैं
आप जहागीर तो हम शहनशाह हैं
आप ज़िन्दगी भर अनारकली पे लटके रहे
हमारी तो हर गली में मुमताज हैं


© Yashwant Mehta




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