मंगलवार, 12 जनवरी 2010

हिंदी ब्लॉग जगत में चोरो के खिलाफ छेड़ी जाये मुहीम

डॉ रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" की रचनाये चोरी हुईं। उन्होंने अपने ब्लॉग पर इस बारे में पोस्ट लिखा।किसी भी रचनाकार की रचनाये चोरी हो तो बहुत दुःख होता हैं। रचनाकार के मन की स्थिति का वर्णन शब्दों में करना असंभव हैं। माँ सरस्वती कृपा करती हैं तो रचनामृत बरसता हैं। कवि लिखता चलता हैं और पाठक उस आनंद में खोते जाते हैं।

हिंदी ब्लॉग जगत में कईं रचनाकार सक्रिय हैं जो बिना किसी आर्थिक स्वार्थ के अपनी रचनायों को सहर्ष ब्लोग्स पर डालते हैं। हिंदी ब्लॉग जगत में विचरण करा तो पाया कि यहाँ हर तरीके के ब्लॉग चल रहें हैं। गज़लों ,
कवितायों, लघु कथा, उपन्यास , तकनिकी शिक्षा और आर्थिक शिक्षा आदि प्रकार के ब्लॉग सुचारू रूप से चलाये जा रहें हैं। अनेक रचनाकारों की पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रिय पुरस्कारों से सम्मानित रचनाकार यहाँ पर उपस्थित हैं।

ब्लोग्स आम जनता को अपने पसंदीदा रचनाकारों के करीब आने का मौका देते हैं। नवोदित और छुपे हुएरचनाकारों के लिए ब्लॉग पाठको तक पहुचने का एक सरल माध्यम हैं। जाने कल कौन सा प्रेमचंद ब्लॉग की दुनिया से निकल हिंदी-साहित्य की दुनिया में छा जाये। अभिव्यक्ति की स्वंत्रता प्रदान करता यह मंच लेखनी की सुधारवादी प्रक्रिया को बनाये रखने की सुविधा देता हैं।

जाल की दुनिया का यह मंच(ब्लोग्स) मुझ जैसे छोटे-
मोटे डायरी लेखको के लिए एक ऐसा केंद्र हैं जहाँ बिना किसी रोक टोक के खुद को प्रकट किया जा सकता हैं। हिंदी ब्लॉग जगत की उड़न तस्तरी श्री समीर लाल समीर का हालिया पोस्ट पढ़ाउनकी कुछ पंक्तियाँ यहाँ प्रस्तुत करना चाहूँगा।

"इन्टरनेट प्रचलन में गया, ब्लॉग खुल गये. अब आप ही लेखक और आप ही संपादक. जो जी में आये, छापो"

"आज सुनाने के लिए लोगों को खोजना नहीं होता, ये दीगर बात है कि हिन्दी ब्लॉगिंग में अभी भी सुनने वाले उसी टाइप के हैं जैसे पहले थे याने अपने खीसे में अपनी डायरी दबाये सुनाने का लोभ पाले सुनने वाले. थोड़े ही हैं जो इससे अलग हैं कि शौकिया सुनने चले आये."

''इस प्रक्रिया में चूँकि सभी सुनाने वाले ही आपको पढ़ रहे हैं तो स्वभाविक तौर पर आप उनको, कम से कम, लेखन से जानने लगते हैं."

यह हैं ब्लॉग जगत पर छोटे-मोटे डायरी लेखको के आने का कारण। यही नहीं सार्थक लेखन की खोज भी यहाँ तक खीच लाती हैं। अनामदास का चिट्टा, घुघूती-बासूती, नुक्कड़, मोहल्ला, तरकश, उड़न तस्तरी,फुरसतिया, रवि रतलामी, प्रगत भारत, गाहे बगाहे तथा अन्य कई ब्लॉग ऐसे हैं जिन्होंने मुझे व्यक्तिगत तौर पर प्रभावित किया कविता और गजलो के भी कई ब्लोग्स बहुत उत्तम हैं हर ब्लॉग की अपनी एक खासियत हैं यह सफ़र आगे भी जारी रहेगा

कहीं मुद्दे की बात से भटक ना जाऊ इसलिए ब्लॉग विवेचना से आगे बढता हूँ बात हैं किसी रचनाकार को ठेस पहुचने की उसकी रचना का दुरुपयोग करने की, चोरी करने की यू तो ब्लॉग जगत भी राजनीति के प्रपंचो से दूर नहीं दीखता अभी कल-परसों ही महेंद्र मिश्र "मिसिर जी" का पोस्ट पढ़ा आखिर कुछ ठेस तो उनके मन को भी पहुची होगी जो उन्होंने ब्लॉग जगत छोड़ने की बात कर दी खैर आज वो फिर से वापस सक्रिय हो चुके हैं काफी अच्छा लगा देखकर

पर चोरी की बात बिलकुल नहीं अच्छी लगती मैं तो यह मानता हूँ कि हिंदी ब्लॉग जगत से जुड़े जितने भी लोग हैं चाहे वो सक्रिय हैं अथवा निष्क्रिय, कही कही एक ही कड़ी उनको जोडती हैं और वो हैं हिंदी की सेवा अब अगर पोस्ट चोरी होकर कहीं और लगेगी तो क्या रचनाकार के भावुक मन को ठेस नहीं लगेगी वो बिना किसी स्वार्थ के यहाँ लिख रहा हैं पाठकगण रोज टकटकी लगा कर लेखक के अगली पोस्ट का इंतजार करते हैं चोरी से आहत रचनाकार जिस दिन लिखना बंद कर दे और अपने ब्लॉग को ताला मार दे तो सोचिये दीवानों का क्या होगा वो भी चले जायेंगे नुकसान किसका होगा? हम सबका? सम्पूर्ण हिंदी ब्लॉग जगत का

जहाँ हम हिंदी को आगे बढाने की बात करते हैं, अपने अपने ब्लॉग पर गर्व से हिंदी लिखते हैं उन पोस्ट्स पर टिप्पणिया आती हैं अगर यह प्रक्रिया भी रुक जाये तो बढेगी हिंदी आगे फिर? वैसे ही हिंदी-जगत में कई लुटेरे हैं जो हिंदी के अंग्रेजी करण को बढावा दे रहे हैं अपने ही उलटे सीधे तरीको से हिंदी का बलात्कार करने में लगे हुए हैं इन सबका शिकार होते हैं मेरे जैसे युवा जो तो हिंदी ढंग से लिख पाते हैं अंग्रेजी मन में विचार तो होते हैं पर भाषा का न्यूनतम ज्ञान उन्हें बाहर नहीं निकलने देता

चोर तो चोर ही होते हैं लेखक के मरने के पचास साल बाद उसकी रचना पर उसके वंशजो का अधिकार नहीं रहता यहाँ तो जीते जागते चोरी होती हैं प्रेमचंद और निराला जैसे महान रचनाकार अमूल्य भंडार अपने पीछे छोड़ के गए जिन निराला का शुरु में विरोध हुआ बाद में कवियों ने उनकी शैली का उपयोग किया प्रेमचंद कभी चैन की दो रोटी खा सके फिर भी लिखते रहे ग़ालिब और प्रेमचंद जैसे लोग जिन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबी में जिया, मरने के बाद भी प्रकाशको को कमा कर दे रहें हैं जब प्रेमचंद, निराला, ग़ालिब जैसे रचनाकारों की अमर रचनायों पर लोगो को पैसा पीटते देखा तो मन व्यथित हो गया आज भी चोरी देखकर मन व्यथित हुआ


जाने कब तक चलता रहेगा यह अब तो इसको रुकना ही पड़ेगा हम इस कुप्रथा का पुरजोर विरोध करते हैंचोरो के खिलाफ मुहीम छेड़ी जाएँहिंदी जगत के सभी ब्लोग्गर्स इस मुहीम में हिस्सा लेकल को आप भी शिकार हो सकते हैं लानत हैं चोरो पर


जय हिंद


9 टिप्‍पणियां:

  1. हम भी आपके साथ इस कुप्रथा का पुरजोर विरोध करते हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  2. thik hai. koe galat bat nahi hai. unko bhi khus ho lene do. mere blog par chhapi rachnayein kuch logo ne apne naam se chhap liya mujhe koi apatti nahi hai mere bahane unko khusi prapt hui koi bhi mere blog ki acchi kavitayein apne naam se chhap bhi lega to uski khusi ki khatir ham usko beijjat nahi karenge yah uchit nahi hai

    उत्तर देंहटाएं
  3. पैरों में बंधन है,
    पायल ने मचाया शोर.
    सब दरवाज़े बंद कर लो बंद,
    देखो आए, आए चोर...

    जय हिंद...

    उत्तर देंहटाएं
  4. यार यशवंत भाई, ये ठीक रही इस लोहडी पे यही किया जाए । वैसे छोडो ज्यादा होंगे नहीं ये चोर , समय समय पर यूं ही इनका ब्लागनिक (जैसे सार्वजनिक होता है )चीर हरण किया जाए । वही ठीक रहेगा ।
    अजय कुमार झा

    उत्तर देंहटाएं
  5. जब भी भले लोगों ने स्वयं को अपने तक सीमित किया है तब तब चोरों के दिमाग खराब हुए हैं............आप राजनीति का हाल देख लीजिये.
    जरूरत है खुल कर सामने आने की.

    उत्तर देंहटाएं