सोमवार, 11 जनवरी 2010

.....इतना ही काफी हैं...लतीफा बन हँसाने लायक तो हूँ.....

कहीं न कहीं तेरे खयालो में अब भी हूँ.....
....ठुकराया हुआ ही सही...तेरा आशिक तो अब भी हूँ......

.....तेरी आँखें नफरत से भरी हैं....मेरे लिए....
....नफरत ही सही....तेरे एहसान के लायक मैं अब भी हूँ.....
.....किस्मत पर नाज हैं मुझे....तेरे चाहने वालो में किसी लायक तो हूँ.....

.....मेरे साये से डरना तेरा.....हाय मेरी गली छोड़ के गुजरना तेरा....
....देख मुझे मुहं फेरना तेरा....
......मजाक बने जब मेरा....तो हसीं का तेरे ओंठो पर महकना.....
.....इतना ही काफी हैं...लतीफा बन हँसाने लायक तो हूँ.....

2 टिप्‍पणियां:

  1. इतना ही काफी हैं...
    लतीफा बन हँसाने लायक तो हूँ.....

    -भई वाह!! क्या समर्पण का भाव है...

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