शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

श्री श्री डबल ४२० ढकोसलानन्द चप्पलखाऊ छेड़छाड़ --- कड़ी २

पिछली कड़ी में हमने आपको श्री श्री डबल ४२० ढकोसलानन्द चप्पलखाऊ छेड़छाड़ महाराज जी की दिनचर्या और उनके विचारो से अवगत कराया था। आज की कड़ी में हम आपको बाबाजी के आश्रम लेकर चलेंगे।

बाबा जी सांसारिक जीवन त्याग कर, एकांत की तलाश में भटकते-भटकते इस जगह आ पहुचे। जब वे यहाँ पर आये तो पूरा इलाका हरा-भरा था। जंगली पशु बिना किसी भय के विचरण करा करते थे। पर आज हालत कुछ और हैं। चारो तरफ बाबा जी ने कंक्रीट की इमारते खड़ी करवा दी हैं। बड़े-बड़े भक्त जनो की सुविधा के लिए बाबा जी ने अत्याधुनिक सुविधायों से युक्त गेस्ट हाउस भी बनवाये हैं। बाबाजी कुछ ही पेड़ो पर दया करी।

जब बाबा जी भोंगे पर गरज़ना करते हैं तो जंगल का राजा शेर भी गीदड़ बन कर अपनी गुफा में घुस जाता हैं। बिचारा शेर अपने ही चापलूस गीदड़ और भेडियों की घटिया राजनीति का शिकार हो गया। गीदड़ और भेडियों ने बाबाजी को जंगल में पैर ज़माने में सहायता करी। बाबाजी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि जब भी आश्रम की सुरक्षा का टेंडर निकलेगा वो गीदड़ और भेडियों को ही दिया जायेगा। परन्तु बाबा जी ने विदेश से बड़े बड़े स्वान मंगा लिए और गीदड़ और भेडियों को भी ठग लिया। भोले-भाले हिरनों को ही बाबाजी का सानिध्य मिला। आश्रम के एक बाड़े में वो आराम से चारा खा रहे हैं।

शहर से इतनी दूर आश्रम बनाने का कारण बाबाजी ने बताया। वे कहते हैं कि उन्हें मीडिया से दूर रहना भाता हैं। वो बिना किसी प्रचार के अपना कार्य करने में विश्वास रखते हैं।

प्रवचन

बाबाजी बहुत व्यस्त रहते हैं इसलिए उन्होंने कुछ विद्वानों को नौकरी पर रखा हैं, यह विद्वान् ग्रंथो को चाटने के बाद बाबाजी का प्रवचन तैयार करते हैं। बाबाजी ने एक प्रवचन तैयार होने की कीमत बताने से इंकार कर दिया। जब भी बाबाजी किसी शहर में प्रवचन करने जाते हैं तो प्रवचन स्थल पर कुछ भक्त छोड़ दिए जाते हैं। बाबाजी के प्रति असीम प्रेम दिखाते हुए यह भक्त प्रवचन स्थल पर डांस करते हैं। बाबाजी के चमत्कारों का भी बखान भी करते हैं। आने वाले दिनों में बाबाजी अपना निजी टीवी चैनल खोलने की योजना बना रहें हैं।


अगले कड़ी बाबाजी की अंतिम कड़ी होगी।

कैमरामेन बंद चक्षु के साथ मैं आलतू फालतू ढोलक युगक्रांति ब्लॉग के लिए।


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