गुरुवार, 28 जनवरी 2010

मेरे मित्र की हत्या हो गयी और मैं कुछ न कर सका

वो मेरा मित्र था। १० साल से हम एक दुसरे को जानते थे। एक दुसरे का स्पर्श बखूबी पहचानते थे और जब मिलते थे तो एक दुसरे से लिपट जाते थे। वो कभी कुछ नहीं बोलता था पर मेरी बातें बड़े ध्यान से सुनता था। उसकी खामोशी ही मुझे सबसे ज्यादा प्यारी थी। सभी रिश्तो-नातो से मुहं फेर कर में जब उसके पास जाता था तो वो इसी खामोशी से मुझे समझाता था। कईं बार हम घंटो बैठकर बतियातें थे। मुझे बोलने की जरुरत ही नहीं पड़ती थी वो मेरे मन के भाव पहचान जाता था। वो मेरे से कारण नहीं पूछता था। जब मैं खुश होता था तो वो भी बहुत खुश होता था। जब मैं दुखी होता था तो वो भी दुखी होता था। हमारे बीच में होने वाले संवाद की भाषा सिर्फ हम दोनों ही जानते थे।

उसकी और मेरी दोस्ती सबसे छुपी हुई थी। कोई नहीं जानता था कि हम दोनों दोस्त हैं। जब मैं परीक्षा में पास हुआ तो मिठाई लेकर उसके पास गया। उसने वो मिठाई सबमे बाँट दी। खुद एक बार भी न चखी। सबको मिठाई खाते देख वो बहुत खुश हुआ।

उसने मुझे हमेसा दिखाया कि आंधी-तूफान का मुकाबला कैसे किया जाता हैं। जीवन के संघर्ष के लिए जरुरी पाठ वो हमेसा सिखाता रहा। स्वभाव से वो कडवा था परन्तु गुणों से भरा हुआ था। उसके गुणों का बखान शास्त्र भी करते थे। परन्तु उसमे एक रत्ती भी अभिमान नहीं था। सबको एक ही भाव से लेता था। उसका धरम था---सेवा।

जब मुझे एक लड़की से प्यार हुआ तो मैंने उसे अपने दिल की बात बताई। उस दिन वो बारिस में जमकर नाचा। उसने मुझे प्रेम करना सिखाया। जब उस लड़की ने मेरे प्रेम को अस्वीकार कर दिया तो वो मेरे साथ जम कर रोया। हम दोनों घंटो खामोश रहे। उस दिन उसने कहा, तू मेरे जैसा हो जा। सबको एक ही भाव से प्रेम कर।


पिछले रविवार मैं उससे मिलने गया। पर पता लगा उसकी हत्या हो गयी हैं। उसकी जगह खाली थी। हत्यारो ने उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए। मेरा दोस्त इस वार को भी हँसते-हँसते सह गया।
वो कौन था?? वो एक नीम का पेड़ था। मेरे मित्र की हत्या हो गयी और मैं कुछ ना कर सका।
सिर्फ एक पोस्ट लिख रहा हूँ उसकी याद में।
हत्यारों से भी क्या अपील करूँ, बहरे हैं वो सब।
कौन हैं हत्यारा? हम सब हैं हत्यारे ---आपनी जरुरतो के लिए रोज काट रहे हैं पेड़ो को।

3 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ वर्षों बाद बचे-खुचे नीम के पेड़ भगवान से कहेंगे कि हे भगवान मैंने इंसान को बहुत समझाया था कि मत काट जीव जन्‍तुओं को, मत काट पेड़-पोधों को। लेकिन तब इंसान नहीं माना। आज उसी का अन्‍त हो गया। वह सचमुच अच्‍छा था मेरा दोस्‍त था।

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  2. bilkul sahi kaha aapne main khud dilli main ho rahi yeshi hatyawon se bahut dukhi hun

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