गुरुवार, 7 जनवरी 2010

....यहीं तेरे शहर में....

...मुसाफिर हूँ..
....कुछ दिन के लिए ही रुका हुआ हूँ...
....यहीं तेरे शहर में....

....दुआ कर...
...कि मौत नसीब हो....
.....खाक हो जिंदगी मेरी....
....यही तेरे शहर में......

....जनाजा गुजरे....
...तो तेरे मकान के सामने से....
....दो मोती तो गिरे किसी आंख से.....
....यहीं तेरे शहर में......

....कफ़न मेरा तेरे आँचल से अगर बने.....
....मेरी रूह तेरे आँगन में ही रहे....
....तू रोये मेरी याद में.....
....यहीं तेरे शहर में......

...दफ़न करना मुझे....
....वो पीर वाले कब्रिस्तान में....
...कुछ फूल तो तेरे हाथो से गिरे...मेरी कब्र पर...
....यहीं तेरे शहर में...


©Yashwant Mehta


2 टिप्‍पणियां:

  1. दफ़न करना मुझे....
    ....वो पीर वाले कब्रिस्तान में....
    ...कुछ फूल तो तेरे हाथो से गिरे...मेरी कब्र पर...
    ....यहीं तेरे शहर में...
    Bahut khoob !

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