रविवार, 10 जनवरी 2010

मेरे भीतर का शायर

पैमाना भी खाली
मयखाना भी खाली

खाली हैं....साकी भी खाली..
..
दीवाना रूठ गया जबसे मोहब्बत से...... तब से हैं सबकुछ खाली.
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अगले पल में जीना

मानो इस पल की मौत

पिछले पल में जीना

मानो हर पल की मौत

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बैचैनी
से रिश्ता पुराना हैं
मेरा दिल तो तनहाई का ठिकाना हैं

जोड़ता हूँ किसी तरह दिल के टुकडो को जब भी
टूट कर बिखर जाता हैं यूं जैसे शराबी कोई पुराना हैं **********************************
दर्द
के दरिया में गोते लगाये हैं
लुफ्त-ऐ-सितम भी क्या खूब खाएं हैं

अश्क भी अब गिरकर सुख गए हैं

कि अजल को बुलाने के लिए हमने ख़त लिखवाए हैं
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हाय बीत गया उम्मीद का मौसम
बुझ गया इंतजार का चिराग

रंग उड़ गया गुल का

जब माँगा तुमने मोहब्बत में हिसाब


©Yashwant Mehta


1 टिप्पणी:

  1. वाह वाह बहुत सही है एक शायर की शायराना ज़िन्दगी शुभकामनायें

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