शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

...एक किलो जिंदगी मिल जाती....

.... २ साल के एक तरफ़ा प्यार में....
....अगर तेरी एक ग्राम मुस्कान खिल जाती.....
....तो मुझको एक किलो जिंदगी मिल जाती.......

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.....मेरे इश्क का दर्द मुझको ही तो समझ आता हैं....
.....कितना तपड़ता हूँ मैं सिर्फ इश्क ही जानता हैं......


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......क्या कहूँ तेरी नाराजगी से कि वो एक तरफ हो जाये.....
.....मैं तुझ में मिल जाऊ, तू मुझ में मिल जाये........

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....देखा जो मन के भीतर तुझ को ही पाया.......
.....खुद को देखा तो तेरे दर पे खड़ा पाया........


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......दो मिसरे रोज़ मैं मोहब्बत के नाम लिखता हूँ ....
.....एक सुबह लिखता हूँ, एक शाम लिखता हूँ......


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.....लोग कहते हैं "फकीरा" दर्द ही क्यूँ लिखता हैं.....
.....लोगो को नहीं पता, कि आशिको की मंडी में दर्द ही बिकता हैं.....

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©Yashwant Mehta



3 टिप्‍पणियां:

  1. ..अगर तेरी एक ग्राम मुस्कान खिल जाती.....
    ....तो मुझको एक किलो जिंदगी मिल जाती.....

    -क्या बात है!! :)

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