शनिवार, 9 जनवरी 2010

टिप्पणी पार्टी और टिप्पणी विरोध पार्टी

इधर हिंदी ब्लॉग जगत में टिप्पणी करने और करने को लेकर जंग छिड़ी हुई हैं। सब अपनी अपनी कह रहे हैं तो हमने सोचा हम भी कुछ कह ले। अवधिया जी तो टिप्पणियो की दुकान खोलने की बात कर रहे हैं। अवधिया जी यह तो बता दीजिये कि टिप्पणी आर्डर करने के कितने देर में मिल जाएगी। टिप्पणियो के प्रकार और आकार पर एक पोस्ट लिख डालिए। आपके दोनों किरदार(नाम लिखने के लिए माफ़ी, काफी खतरनाक नाम हैं), पर कुछ भी हो बात में दम हैं उनकी। जिस गहराई से बात करते हैं, टिप्पणीकारो के दिल को छु कर जाती हैं। घायल और कायल दोनों ही जम कर टिप्पणिया करते हैं फिर। सॉफ्टवेर वाला आईडिया भी बेहतरीन हैं। पर हम भी बता दें यह जो "टिप्पणी पार्टी" वाले लोग हैं इनको कुछ मत कहिये। इनका राज हैं हिंदी ब्लॉग जगत पर। और खरी खरी बता देते हैं, यह हैं तो हिंदी ब्लॉग जगत हैं और यह नहीं तो हिंदी ब्लॉग जगत भी नहीं। अब इस पार्टी का सर्वे सर्वा कौन हैं यह तो हम भी नहीं जानते। जानेगे भी कैसे, नए नए जो आये हैं।

आज दोपहर वाणी जी का ब्लॉग पढ़ा। पहले अवधिया जी के तर्कों से प्रभावित था अब मैं वाणी जी के तर्कों को भी नहीं काट सकता। भैया, अभी तो कह दिया कि
टिप्पणीकारो के दम पर ही हिंदी ब्लॉग जगत टिका हैं। और उनकी बात भी सही हैं कि प्रोत्साहन के बिना काम भी नहीं चलता। नहीं तो पागलो की तरह कोई अपना ब्लॉग लिखता रहे और खुद ही टिप्पणी मारकर खुश होता रहे। बोलिए कोई ब्लॉग चल सकता हैं बिना टिप्पणी के? बिलकुल नहीं।
कदापि नहीं।

अब मेरा सुझाव यह हैं कि अगर इन "टिप्पणी पार्टी" वालो को सत्ता से हटाना हैं तो महाराज एक "टिप्पणी विरोधी पार्टी" का घटन हो जाये। कृपया सभी टिप्पणी विरोधी लोग इस पार्टी में शामिल हो और विरोध में जम कर टिप्पणियां करें।


15 टिप्‍पणियां:

  1. मुझसे किसी ने पूछा
    तुम सबको टिप्पणियाँ देते रहते हो,
    तुम्हें क्या मिलता है..
    मैंने हंस कर कहा:
    देना लेना तो व्यापार है..
    जो देकर कुछ न मांगे
    वो ही तो प्यार हैं.

    -अपनी मातृ भाषा से प्यार करिये और उसे जाहिर करिये-

    आईये, साथ जुड़िये..इस संदेश को विस्तार दिजिये..इसे अपने हस्ताक्षर बनाईये. कम से कम आपसे तो यह आशा कर ही सकता हूँ...

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  2. भाई हमें तो पिछले दो सालों में न तो कोई टिप्पणी पार्टी मिली न टिप्पणी विरोधी |
    हाँ समीर जी जैसे कुछ भले लोग टिप्पणी के माध्यम से नए पुराने ब्लोगर्स का उत्साह वर्धन का नेक कार्य करते रहते है उनकी जितनी प्रशंसा की जाये कम ही है |

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  3. सबसे पहले सभी बड़ो को सादर प्रणाम....
    @समीर जी....आपकी बात बिल्कुल सही हैं और यह भी मानिये कि आप जैसे भले लोगो के कारन ही नए हिंदी ब्लोगर्स को स्नेह मिलता हैं....हमने तो यह बात कह ही दी, कि टिप्पणीकारो के बिना ब्लॉगजगत अधुरा हैं......आपकी उड़न तस्तरी बस युहीं ब्लॉग जगत में विचरण करती रहे तो नए हिंदी ब्लोगर्स को अपनी बात कहने का मौका मिलेगा....हिंदी का गौरव सदेव कायम रहेगा.. ..आपकी आशा पर मैं खरा उतरने की पूरी कोशिश करूँगा.....

    @शेखावत जी....सबसे पहले तो मैं आपके सर पर शान से सवार राजस्थानी पगड़ी की प्रशंसा करना चाहूँगा....बहुत अच्छी लग रही हैं आप पर....मैं अवधिया जी के चिट्ठे पढ़ रहा था, फिर वाणी जी का चिटठा पढ़ा.....बस वहीँ से प्रेरणा प्राप्त कर यह व्यंग लिख दिया.....अवधिया जी की बात भी अपनी जगह ठीक हैं और वाणी जी की भी.....टिप्पणियो में सार्थकता होनी चहिए......
    और समीर जी जैसे भले लोगो की प्रोत्साहन करने वाली टिप्पणियो से ही हम जैसे छोटे मोटे ब्लोग्गर्स यहाँ कायम हैं और अपनी बात कह सकते हैं........उनके स्नेह का मैं आभारी हूँ...

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  4. भई जब भी टिप्पणीकारों की बात होती है उसे हम पर्सनली फ़ील करते हैं , देखिए आप दिल्ली के हैं सो पहले तो आपके फ़ौलोवर बन गए अब आप दिल के शहर के हैं तो हम भी अपना दिल मिलाने को आ गए ..जी टिप्पी तो चलती ही रहेगी ,,साथ साथ हम आप भी

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  5. यशवंत भैया,
    ये भेदभाव ठीक नहीं...टिपप्णी पार्टी में प पूरा और टिप्पणी विरोध पार्टी में प आधा...अब टिप्पणी में पा..पा..पा..पा..करते रहें क्या...

    जय हिंद...

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  6. खुशदीप जी भेदभाव ख़तम कर दिया हैं, सबको आधा प दे दिया हैं.....

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  7. अहोभाग्य हमारे कि हमारा लिखा किसी के काम तो आया ....ये तो जान ही गए होंगे कि हम पक्के टिप्पणी समर्थक पार्टी के हैं ...हम तो इसी के सहारे यहाँ तक पहुंचे हैं ...अब नए ज़माने का ये दस्तूर कि जिस सीधी से चढ़ कर आये हो सबसे पहले उसी को लात मरो ...हमसे तो नहीं होगा ..!!

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  8. भाई मैं तो निर्दलीय हूँ...:)

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  9. यशवंत जी!

    मैं टिप्पणी का विरोधी बिल्कुल नहीं हूँ। यदि विरोधी होता तो अपने ब्लॉग में टिप्पणी को स्थान ही नहीं दिया होता और न ही किसी अन्य के ब्लॉग में जाकर टिप्पणी करता। मैं मानता हूँ कि टिप्पणी लेखक का उत्साह बढ़ाती है। वाणी जी के पोस्ट में भी जाकर मेरी टिप्पणी देख लीजिये, वहाँ भी मैंने टिप्पणी का किसी प्रकार से भी विरोध नहीं किया है।

    मेरा विरोध तो येन-केन-प्रकारेण टिप्पणियों की संख्या बढ़ाने से है। मेरा विरोध है ऐसी टिप्पणियों से भी है जिनका पोस्ट के विषय से न तो कोई सम्बन्ध होता है और न ही जिनका कुछ अर्थ निकलता है। कई टिप्पणियाँ तो ऐसी होती हैं जो कि पोस्ट के गम्भीरता से पाठक का ध्यान ही हटा देती हैं और गम्भीर पोस्ट महज एक मजाक सा बन कर रह जाता है। कुछ टिप्पणियाँ तो ऐसी भी होती हैं जिसे पढ़ कर ब्लॉग लेखक को समझ में ही नहीं आ पाता कि टिप्पणीकर्ता क्या कहना चाहता है। अनेक बार मैं अपने पोस्टों में ऐसी ही टिप्पणियाँ पढ़कर अपना सिर धुना हूँ।

    आप भले ही मानते हों किन्तु मैं नहीं मानता कि हिन्दी ब्लॉगजगत पर किसी का राज है। मेरे विचार से तो हिन्दी ब्लॉगजगत कोई राज करने का स्थान नहीं है, यह तो विचारों के आदान-प्रदान करने का माध्यम है।

    रही बात टिप्पणियों के दूकान वाली मेरे पोस्ट की तो वह तो पोस्ट लिखने की एक शैली मात्र थी। मैं तो बस एक रोचक शैली में अपनी बात कहना चाहता था। और मैं समझता हूँ कि मेरे अधिकांश पाठकों ने मेरे पोस्ट के भाव तथा अर्थ को समझा भी है।

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  10. अवधिया जी सादर चरण स्पर्श
    मैंने तो पोस्ट में ही कह दिया हैं कि "टिप्पणियो" में "सार्थकता" होनी चहिए और यही बात आपके पोस्ट में कही गयी हैं। यह तो मात्र एक व्यंग हैं। जिस प्रकार से आपके दोनों किरदार काल्पनिक हैं यह पार्टियाँ भी उतनी ही काल्पनिक हैं।

    साभार
    यशवंत मेहता

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  11. पार्टियों के सदस्य कैसे तय होंगे?

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  12. ham kisee party mai nahee bhai par tippanee karte rahenge
    idhar bhee udhar bhee
    nehru chcha mare uske baad hamne paida hona sweekar kiya so ab hamaare hee maathe nirgut aandolan kaa bhaar hai so nibhaa rahe hai

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