शनिवार, 9 जनवरी 2010

एक अपील दिल्ली मेट्रो और उसमे सफ़र करने वालो से

दिल्ली मेट्रो दिल्लीवासियो के रोजमर्रा जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी हैं। अब तो मेट्रो रहित दिल्ली की कल्पना गवारा नहीं करतीद्वारका को नॉएडा से जोड़ चुकी दिल्ली मेट्रो बस थोड़े ही दिनों में गुडगाँव पहुचने वाली हैंबदर पुर बोर्डर और एअरपोर्ट वाली लाइन पर भी काम सुचारू रूप से चल रहा हैंसमय से पहले कार्यो को पूराकरना वाली मेट्रो टीम की जितनी प्रसंसा की जाये, कम हैं

आनंद विहार टर्मिनल वाली लाइन भी शुरू हो चुकी हैंकल एक जरुरी काम से लक्ष्मी नगर जाना हुआसुबह का समय था ,तो मेट्रो में भीड़ होना लाजमी थामेट्रो के दरवाजे में लोगो के गतिरोध पैदा करने से ट्रेन हर स्टेशन पर ज्यादा समय रुक रही थीट्रेन चालक भी बार बार सहयोग के लिए अपील कर रहा था


दिल्ली वालो को मेट्रो की यात्रा करते हुए अब काफी समय गुजर चुके हैंपरन्तु अभी भी कईं लोगो में शिस्ताचार की कमी दिखाई पड़ती हैंचढ़ने वाले लोग मेट्रो का दरवाजा खुलते ही ऐसे भागते हैं जैसे स्कूल की छुट्टी होने पर बच्चे भागते हैंकईं बार देख कर हँसी जाती हैं। परन्तु उनके इस तरह के बर्ताव से उतरने वालो की स्थिति दयनीय हो जाती हैंमहिलाओ, बुजुर्गो और बच्चो का हाल तो बहुत बुरा होता हैंमेट्रो ने राजीव चौक और कश्मीरी गेट पर लाइन सिस्टम सुचारू रूप से चलाने के लिए कर्मचारी तेनात कर रखे हैं। हर स्टेशन पर करना मुमकिन नहीं इस स्थिति में हमारा कर्तव्य बनता हैं कि हम नियमो का पालन करे और एक सभ्य दिल्ली वासी बन कर दुसरो के सामने उदहारण पेश करें आखिर आप एक वैश्विक स्तर के परिचालन तंत्र में यात्रा कर रहें हैं तो आपके व्यवहार का स्तर भी वैश्विक होना चहिए


महिलाओ के लिए विकट समस्या

जैसे जैसे मेट्रो ने दिल्ली को कवर किया हैं, मेट्रो में यात्रा करने वाले लोगो की संख्या में भी इजाफा हुआ हैंमहिलाओ को भी इस भीड़ के कारण अनेक समस्यों का सामना करना पड़ रहा हैंमेट्रो से हमारी मांग हैं कि महिलाओ के लिए स्पेशल कोच से जल्द सुनिश्चित किये जाएँ ताकि वे सुरक्षा और अनिश्चिता के साथ सफ़र कर सकेंआने वाले समय में अगर दिल्ली मेट्रो महिलाओ के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने की पहल करती हैं तू यह कदम स्वागत योग्य होगा

3 टिप्‍पणियां:

  1. असली समस्या है कि मेट्रो चलाने के पहले यात्रा करने वालों को शिष्टाचार की शिक्षा नहीं दी, और यह समस्या आप कॉमनवेल्थ गेम्स में भी देखेंगे। केवल इंफ़्रास्ट्रक्चर अच्छा होने से इंटरनेशनल शहर का दर्जा प्राप्त नहीं हो जाता है, वहाँ के लोगों को भी वैसा ही व्यवहार करना चाहिये ।

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  2. बहुत अच्छी सलाह है। मगर हम नहीं सुधरेंगे। धन्यवाद।

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  3. दिल्ली वालों को अभी बहुत कुछ सीखना है।
    एक ज़बरज़स्त अभियान की ज़रुरत है, जो अभी तक दिखाई नहीं दे रहा।

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