सोमवार, 25 जनवरी 2010

गोनू झा

गोनू झा बहुत ही चतुर थे। उनकी चतुराई के किस्से बहुत मशहुर हैं। कल गोनू झा का नाम कहीं सुना तो एक उनका एक किस्सा याद आ गया।

एक बार की बात हैं गोनू झा मछली लिए मस्त चल में घर जा रहे थे। वो जिस रास्ते से गुजर रहे थे वही पर एक नाई एक आदमी की हजामत बना रहा था। हजामत बनवा रहा आदमी गोनू झा की बुद्धिमता का बखान करने लगा। नाई ने उस आदमी से कहा कि वे गोनू झा को मुर्ख बना सकता हैं। आदमी ने कहा "मूछ मुंडवा लेंगे बस वो मछली उनसे लेकर दिखा दो वो भी मुफ्त में "।
नाई ने कहा अभी लो। नाई भागता हुआ गोनू झा के पास गया और उनसे बोला.....

"महाराज आपकी माँ मर गयीं हैं"

गोनू झा बिचारे तड़प उठे। अब मछली को घर ले जा कर क्या करते सो मछली उन्होंने नाई को दे दी। इधर नाई ने उनसे मछली ली और उस आदमी के सामने गोनू झा को मुर्ख साबित कर दिया। पर बिचारा जानता नहीं था कि किस से पंगा लिया हैं। जब गोनू झा घर पहुचे तो देखा कि उनकी माँ तो बैठकर गेहूं पिस रही थी। उनकी सब समझ में आ गया।

कुछ दिनों बाद गोनू झा बीमार पड़ गए। बड़े-बड़े वैद्य हकीम आये पर उनकी बीमारी का न पता चला। रात में गोनू झा की बहुरिया ने उनसे पुछा "आखिर बीमारी क्या हैं, भले चंगे तो नजर आते हों, तिन दिन से खाट में पड़े हुए हो"
तो गोनू झा बोले कि उनकी बीमारी का इलाज तो सिर्फ नाई ही कर सकता हैं। उन्होंने बताया कि उनके पीछे एक फोड़ा उग गया हैं जो सिर्फ नाई ही उस्तरे से चीरा लगा सकता हैं।

अगले दिन सुबह नाई को खबर भेजी गयी। तिन दिन से बिस्तर में पड़े हुए गोनू झा का आदेश था कि नाई को गाजे-बाजे के साथ लाया जाये। पूरा गाँव गोनू झा के घर पर जमा हो गया। गोनू झा की खाट को धुप में लाया गया। गोनू झा दर्द से करहा रहे थे। नाई उनके पास आया और बोला "महाराज आप चिंता मत करो, ऐसा चीरा मारूँगा कि उई तक नहीं करोगे"

फिर क्या था। नाई घुस गया खाट के निचे। रस्सियों को काटकर उसने एक छेद बनाया। पर उससे फोड़ा दिखा ही नहीं। उसने जोर से कहा "महाराज फोड़ा कहा हैं??"। तो गोनू झा बोले "थोडा नजदीक से देखो तो दिख जायेगा"।
नाई नजदीक गया। बस फिर क्या था, तिन दिन से मल रोके हुए गोनू झा ने उस पर प्रशाद बरसा दिया। बिचारा नाई हाय-हाय करता अपने घर की तरफ भाग लिया।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें