गुरुवार, 14 जनवरी 2010

कल्पतरु वाले विवेक रस्तोगी जी, आप बहुत अच्छा लिख रहे हैं,

प्रिय विवेक रस्तोगी जी
अभी अभी बस लैपटॉप को बंद ही कर रहा था कि ब्लॉगवाणी पर एक बार क्लिक कर दिया। आपका पोस्ट देखा। सोचा आपसे दो बात कर लू। पहले टिप्पणी करने की सोची फिर सोचा एक छोटा सा पोस्ट ही कर देता हू। सबसे पहले तो यह बता दू कि आप बैंकिंग और मार्केट से जुडी जो उपयोगी जानकारी अपने ब्लॉग पर प्रकाशित कर रहे हैं, वो मैं भी पढ़ रहा हू। आपको उसके लिए धन्यवाद्।
छोडिये न इस चिट्टा चर्चा को। आप बस लगातार लिखते रहिये। मेरे जैसे कई पाठक होंगे आपके जो पढ़ते तो होंगे पर टिप्पणी नहीं करते।

यशवंत मेहता

6 टिप्‍पणियां:

  1. मैने भी अभी उन्‍हें यही बात टिप्‍पणी में कही है !!

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  2. आपसे पूरी तरह सहमत , सच कहा आपने यशवंत जी , और ब्लोग जगत में विषयपरक लेखन वाले कुछ गिने चुने ब्लोग्गर्स में से एक विवेक भाई भी हैं ।हां चर्चा विषयक उनकी शिकायत के लिए उन्हें अपनी सफ़ाई (सिर्फ़ अपनी ) भी दे दी है ,उम्मीद है कि आप भी उससे सहमत होंगे
    अजय कुमार झा

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  3. यशवंत जी,

    यह तो सबका प्रेम है, मुझे पता है पर क्या करें बालमन है न इसलिये कभी कभी मचल जाता है, मेरा लेखन सक्रिय रहेगा, चिंता न करें।

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  4. हम तो विवेक भाई को पढ़ते भी हैं और टिप्पणी भी करते हैं. :)

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  5. Mera bhi yahi kahna hai aap bahut accha likhte hain..aapne meghdoot par likha tha, karn par likha tha.. banking par aap likhte hi hain...aur bhi bahut achhi gyan parakh jaankaariyaan aap dete hi hain...
    isiliye aap ..fikir not..sab theek hai..
    Jha ji kaan pakad kar uthak baithak laga hi chuke hain...:):)

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