बुधवार, 13 जनवरी 2010

....तीर इश्क का जब चलता हैं न..... .....तब न तुम समझ आते हो....न ये इश्क समझ आता हैं....

....तीर इश्क का जब चलता हैं न.....
.....तब न तुम समझ आते हो....न ये इश्क समझ आता हैं....


...शोख हसीना तेरे हुस्न का नशा जब चढ़ता हैं न....
....तब न तुम समझ आते हो....न ये हुस्न समझ आता हैं......


.....सितम भी तेरा जब करम बन बरसता हैं न....
....तब न तुम समझ आते हों....न ये सितम समझ आता हैं.....

....निज़ा में भी जब दीवानापन बढता जाता हैं न.....
.....तब न तुम समझ आते हो....न ये दीवानापन समझ आता हैं.......

.....तेरा प्यार में जब दिल पागल होता जाता हैं न.....
......तब न तुम समझ आते हों....न ये दिल समझ आता हैं......



...."फकीरा" ये दिल्ली का, इबादत मोहब्बत की करता हैं.....
....आशिको की कब्र पर, हर रोज सजदा करता हैं....

©Yashwant Mehta

4 टिप्‍पणियां:

  1. वाकई दि‍ल्‍ली वाले शेर हैं। लोहड़ी की हार्दि‍क शुभकामनाएं।

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  2. bahut khoob.........ishq ka bhoot aisa hi hota hai sabhi ko nachata hai

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  3. हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अगर समुदायिक चिट्ठाकारी में रूचि हो तो यहाँ पधारें http://www.janokti.blogspot.com . और पसंद आये तो हमारे समुदायिक चिट्ठे से जुड़ने के लिए मेल करें janokti@gmail.com
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    जयराम "विप्लव"

    Editor
    http://www.janokti.com/

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  4. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

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