सोमवार, 1 फ़रवरी 2010

श्री श्री डबल ४२० ढकोसलानन्द चप्पलखाऊ छेड़छाड़ महाराज ---- अंतिम कड़ी

आज हम बाबाजी के आश्रम पहुचे। युगक्रांति ब्लॉग पर उनके ऊपर आखिरी पोस्ट लिखने के लिए सामग्री चाहिए थी। जब हम पहुचे तो बाबाजी कोल्ड ड्रिंक की हिलाई हुई प्लास्टिक बोतल के जैसे हुए पड़े थे। हमने उनके चरणों में अपना नकली प्रणाम रखा और हालचाल पुछा।
महाराज का हालचाल आजकल अच्छा नहीं हैं। बोले जब से तुमने हम पर पोस्ट लिखी तो हमारे ७०% ग्राहक भाग गए। चिंता में उन्होंने दाड़ी के बाल उखाड़ना शुरू कर दिया हैं। ऐसे तो सर्दी में ४-५ दिन के अन्तराल पर नहा ही लेते थे, परन्तु पिछले एक महीने से नहाया नहीं हैं। सड़ी हुई मछली के जैसे बदबू फैलाते रहते हैं। आश्रम का हवा-पानी दूषित कर के रख दिया हैं। आश्रम "बाबाजी वार्मिंग" का प्रकोप झेल रहा हैं।
आश्रम के पदाधिकारी ने बताया कि आश्रम की माली हालत भी बिगड़ गयी हैं। असल में चिंता के कारन बाबाजी का मदिरापान बढ़ गया हैं और बाबाजी की यह गंभीर हालत देखकर उनके शिष्यों की चिंता भी बढ़ गयी हैं और वो भी दिन-रात मदिरापान में डूब गए हैं।
बाबाजी की साधना और आराधना भी उन्हें तज कर चली गयी हैं। गोपनीय सूत्रों से हमें पता चला कि एक रात बाबाजी की कुटिया से मारने-कूटने की आवाज आ रही थी। तदुपरांत बाबाजी दो हफ्ते तक कुटिया में ही रहें।
बाबाजी का विदेश जाने का प्रोग्राम भी टल गया हैं। इसके पीछे का कारन पता नहीं चल पाया। बताया जाता हैं कि बाबाजी साधना और आराधना के बिना विदेश नहीं जाना चाहते। हमने सोचा था कि बाबाजी के साथ हम भी विदेश का एक चक्कर लगा लेगे पर सारा प्लान ही चोपट हो गया हैं।

अब ऐसे सड़े-गले बाबा के ऊपर पोस्ट लिखकर क्या होगा। सो यह अंतिम पोस्ट हैं बाबाजी पर।

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