शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

...सीपी....जहाँ शाम जवान होती हैं.....


सीपी बोले तो अपना कनॉट प्लेस को चाहे तो आप दिल्ली का दिल भी कह सकते हैं कनॉट प्लेस का निर्माण १९२९ में शुरू हुआ था और १९३३ में यह बनकर पूरा हुआ इसका डिजाईन रोबेर्ट रस्सेल ने तैयार किया था आज कनॉट प्लेस की पहचान सिर्फ एक बिजनेस सेंटर के रूप में होती हैं बल्कि यह दिल्ली का एक दर्शनीय स्थल बन चूका हैं हम तो यह कहेंगे कि आप दिल्ली आये और कनॉट प्लेस नहीं आये तो जनाब आपका दिल्ली आना बेकार गोल-गोल सफ़ेद खम्बो वाला कनॉट प्लेस आज चारो तरफ से गगन-चुम्बी इमारतों से घिरा हुआ हैं भारत के सारे बैंक आपको कनॉट प्लेस में मिल जायेंगे स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ बरोदा, इलाहाबाद बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम जैसे संस्थान यहाँ उपस्थित हैं भारतीय जीवन बीमा निगम की इमारत की एक अलग ही शान हैं अपनी बनावट और शिल्प के कारण यह इमारत बरबस ही हर टूरिस्ट के कैमरे को आकर्षित करती हैं स्टेट मेन बिल्डिंग भी बहुत सुन्दर हैं इसका डिजाईन अनूठा हैं कनॉट प्लेस में दो सर्कल हैं, इनर सर्कल और आउटर सर्कल इनर सर्कल में ब्लाक और आउटर सर्कल में ब्लाक हैं अगर आप हरियाली के बीच समय गुजरना चाहते हैं तो सेंट्रल पार्क से बेहतर कोई जगह नहीं दिल्ली मेट्रो का एक द्वार सेंट्रल पार्क में भी खुलता हैं परन्तु सुरक्षा के नजरिये से उसे बंद कर दिया गया हैं सेंट्रल पार्क के बीच में एक बहुत ही सुन्दर फव्वारा हैं आजकल यह फव्वारा बंद हैं सेंट्रल पार्क की हरी-हरी घास पर बैठकर सीपी की गोलाई पर नजर डालिए, आपको एक अलग ही अहसास होगा
विकिपीडिया से लिए गए इस चित्र में जो आपको सामने इमारत दिख रही हैं वो भारतीय जीवन बीमा निगम की इमारत हैं
कनॉट प्लेस में कपड़ो, घडियो, गहनों, हस्तशिल्प , जूतों तथा अन्य वस्तुओ के ब्रांड्स के शोरूम हैं अगर आप खादी के कपडे खरीदना चाहते हैं तो वो भी यहाँ आपको मिल जायेगे
कनॉट प्लेस
में आपको पटरी बाजार भी मिलेगा इस पटरी बाज़ार में देश-विदेश की किताबे, हस्तशिल्प, दरिया, बेग्स तथा अन्य सामान मिल जायेंगे विदेश से आयें हैं और विदेशी अख़बार पढने हैं तो जनाब एक नजर पटरी बाजार के किताब वालो पर डालिए इन किताब बेचने वालो के पास आपको विदेशी अख़बार भी मिल जायेंगे किताबे लेते समय थोडा मोल-भाव जरुर करियेगा आप चाहे तो किताबो के लिए दुकानों में भी जा सकते हैंकनॉट प्लेस में किताबो की बहुत पूरानी और जानीमानी दुकाने भी हैं
आप कनॉट प्लेस दिन में घूमिये या रात में, दोनों ही समय कनॉट प्लेस के अलग रूप हैं
क्या कहा समय नहीं हैं? तो आप दोपहर में - बजे के आसपास कनॉट प्लेस आये और शाम - बजे तकघूमिये
खाने-पीने की बात करी जाएँ तो भी आप सही जगह आये हैं कनॉट प्लेस में एक से बढकर एक रेस्तरा हैं फास्ट-फ़ूड , काफी के ब्रांड भी यहाँ उपस्थित हैं रेस्तरा में एक दुसरे की आँखों के समंदर में डूबे जोड़े बहुत मिलेंगे शिवाजी टर्मिनल के साथ छोले-बटुरे और समोसे, कचोडी और पकोड़ो की दुकाने हैं हरी चटनी के साथ पनीर के पकोड़े खाइए क्या हुजुर, तला हुआ मना हैं तो जनाब थोडा सा घूमिये, भारतीय, इतालियन, मुगलई, थाई, चाइना ,सारे व्यजनं मिल जायेंगे बस गोल-गोल सफ़ेद खम्बो के साथ घूमते जाईए और नजर रखिये बोर्ड्स पर मद्रास काफी हाउस में काफी का मजा लीजिये खाने के बाद पटरी से मीठा पान खाइएपालिका बाज़ार भी घूम सकते हैंइलेक्ट्रोनिक्स और कपडे, बेग्स यहाँ मिलते हैं

कनॉट प्लेस का हनुमान मंदिर बहुत प्रसिद्ध हैं। बंगला साहिब गुरुद्वारा भी यहाँ से चंद कदमो की दुरी पर हैंजंतरमंतर तो पार्क होटल के ठीक सामने हैं। जनपथ की अपनी अलग पहचान हैं। बड़ा दिलकश, बड़ा रंगीन, जनाब इसे
कनॉट प्लेस कहते हैं

7 टिप्‍पणियां:

  1. दिल्ली अधिक घूमना कभी हुया नही मगर आपकी पोस्ट देख कर मन कर ग्या देखने का जरूर जायेंगे दिल्ली का दिल देखने । धन्यवाद्

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  2. अच्छी जानकारी । मौका मिला तो आपकी सलाह काम आएगी

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  3. बहुत घूमे एक समय में कनाट पैलेस..आज बहुत यादें ताजा हुईं. निरुला में खाना या काके के ढ़ाबे में..दोनों में लुत्फ उठाया है.

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  4. गया तो कई बार हूँ पर आपके चित्रों में ये ज्यादा खूबसूरत लग रहा है। ये फव्वारा क्या पालिका बाजार के ऊपर बना है?

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  5. मनीष जी, चित्र विकिपीडिया से लिये है, ये फ़व्वारा सेंट्रल पार्क पर है, पालिका बाजार पर नहीं है, आजकल बन्द है.

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  6. mere blog tak aane kaa dhanyavaad ....aapka blog dekha ...badhiya laga....

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  7. सी पी की ऐसी तसवीरें पहले नहीं देखी थी

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