शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

एक सूखता गुलाब मधुशाला में.......


मेरे
प्यार का गुलाब
कभी खिला था मधुशाला में....

मेरे प्यार का गुलाब
अब सूख रहा हैं मधुशाला में.....

सूख कर मिट जाता
अगर शरण न मिलती मधुशाला में...

निर्दयी साकी तू भी देख
एक सूखता गुलाब मधुशाला में....

2 टिप्‍पणियां:

  1. acha laga pad kar

    ye meri bhi aatma ki awaj he janab
    shekhar kumawat
    http://kavyakalash.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. मेरे प्यार का गुलाब
    कभी खिला था मधुशाला में....

    मेरे प्यार का गुलाब
    अब सूख रहा हैं मधुशाला में.....

    सूख कर मिट जाता
    अगर शरण न मिलती मधुशाला में...

    निर्दयी साकी तू भी देख
    एक सूखता गुलाब मधुशाला में....

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