गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010

सो मैं अब ब्लोगिंग से चलता हूँ

ब्लोगिंग एक नशा हैं
और नशा सेहत के लिए अच्छा नहीं होता
मैं किसी नशे की गिरफ्त में नहीं रहना चाहता
सो मैं अब ब्लोगिंग से चलता हूँ

स्नेह मिला सबसे सो आभारी हूँ सबका
एक ब्रेक की जरुरत हैं 

12 टिप्‍पणियां:

  1. ऐसे कैसे चले जाओगे भईया , ये सही नही है मुझे वापस बुलाकर आप चल दिये , आप जल्दी आईये नयी पोस्ट के साथ ।

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  2. युग क्रांति एक सोच एक जज्बा -क्या हुआ भाई ,कहाँ चल दिए -
    आईये .....जीवन भागने का नाम नहीं है .......जब तक साँस है तब तक आस है .

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  3. भई अचानक से ये ब्लाग वैराग्य क्यूँ जाग उठा? किसी से कुछ तनातनी हो गई क्या? छोडिए इन बातों को ओर काम पे लग जाईये...

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  4. ब्‍लॉगिंग से चलो
    आपके लिए भी
    मिथिलेश दुबे के
    अनुसार ही
    छुट्टियों की
    दी जाती है
    स्‍वीकृति।

    ब्‍लॉगिंग से जरूर चलो
    छुट्टी पर
    पर ब्‍लॉगरों के होली मिलन
    पर सपरिवार अवश्‍य मिलो।

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  5. ब्रेक तो जरूरी है. अवश्य लें. लेकिन ब्रेक को जल्दी ही ब्रेक भी कर दें.

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  6. ले लो भई ब्रेक..मिलते हैं ब्रेक के बाद!

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  7. उम्मीद है ब्रेक बहुत छोटी ही होगी।

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  8. सीढी अब भी उसी टंकी के सहारे खडी है , अभी अभी एक छोटे भाई को उतारा है , पलक झपकी तो दूसरा दौड कर बैठ गया उस पर ,चलो फ़टाफ़ट आ जाओ नीचे ,,,,,यार तुम लोग मेरी संगत में रह के बिगड गए हो एकदम ।
    अजय कुमार झा

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  9. ब्रेक पर ! ठीक है...हम भी दूसरे ब्लाग घूम कर आते हैं तब तक...

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