रविवार, 14 फ़रवरी 2010

महबूबा के गम में मत मर जाओ....."बाबा फ़कीरा" रचित वेलेंटाइनमय चिठ्ठाचर्चा पढ़ जाओ....(यशवन्त मेहता)

प्रेमियो उतारो वेलेंटाइन की खुमारी
सुनो चिठ्ठा चर्चा हमारी

हसंते हसांते तनेजा जी सुनाते गोवा की कहानी
बिन मागें मोती मिले मागें मिला ना पानी

आधुनिक शकुन्तला का प्रेमपत्र दुष्यंत के नाम
वेलेंटाइन पर अवधिया जी पहुचांते पैगाम

अनूप जी ने बताया बसन्त आया है
पढ़िये देखिये कितना बसन्तमय पोस्ट लगाया है

काश तेरे प्रेम में हम प्रेम चिह्न बन जाये
रंजूजी की कविता काश नहीं जरुर पढ़ कर आये

अंग्रेज लोगन के बलटिहान बाबा की मची धूम
पचंम जी बताते सदरु के गांव में कैसे लोग रहे झूम

अरे लव गुरू का दुनिया को देते हो बस लव की सलाह
सुनो जरा दीपक मशाल से एक जरुरी सलाह

धर्मपत्नी जी को बोले खम्भे जैसी खड़ी है ...मियां गजब के सनकी
आलसी महाराज कर रहें है गतिशील खम्बें की भक्ति

गधा पचीसी की उम्र, लिखवाने पहुंचा कोई उनसे प्रेम पत्र
माजरा समझ के आयें, वेलेंटाइन छाया हुआ सर्वत्र

लोग प्यार में ना जाने क्या क्या कर गुजरते हैं
कुछ 'वैलेंटाइन डे'...ऐसे भी, गुजरते हैं

एक काम की बात बताते है चलो हमारें संग
वेलेंटाइन डे में भर दो भारतीय संस्कृति के रंग

जब कर लिया है सारा काम
तो पढ़ो ये खत वेलेंटाइन के नाम

पिछ्ले बरस भागी वेलेंटाइन मनाने कामवाली
दराल साहब बताते इस वेलेंटाइन पर बात काम वाली

पांच रुपये का साबुन, दस रुपये के झाग
वेलेंटाइन पर मोरा दिल बाग बाग

बिन कटे ही हर आशिक मुर्गा हलाल है
उसका गुलाब तुम्हारे गुलाब से ज़्यादा लाल है!

क्या दिल्ली क्या गोवा क्या जम्मू क्या हाथरस
सब जगह फ़ैला प्यार का वायरस

अरे आशिको छोडो चोकलेट, टेड्डी, कार्ड की बात
आज के दिन हम करें, नये उपहार की बात

अपनी विदाई के दिन हम बडे भाव विह्वल थे
वेलेंटाइन से दो दिन पहले बडे़ मीठे पल थे

क्यों धडकता है मन क्यों सुहानी सी लगे शाम
बसन्त का एक दिन जवान दिलो के नाम

समय से परे खुदा से ऊपर इश्क का रंग मेरे मन पर
अब क्यों नहीं लिखता मै कविता तुम पर

ऐसा वैसा कैसा जैसा होता है
वेलेंटाइन ऐसा होता है।

सर्टिफ़ाइड टांग खिंचाई

बन्दूक एक हाथ में दुजे से मुछों पर ताव 
राजा नल बन गये दमयन्ती का पता तो बताओ

_______________________________________
अब एक सलाह मिथिलेश की कलम से
_______________________________________

तो वेलेंटाइन चिठ्ठा चर्चा खत्म
प्लीज कवि फ़कीरा का एक शेर सुन जाओ
खुजलाते खुजलाते दाद दे जाओ


"इश्क मोह्ब्बत प्रेम प्यार तेरे कितने नाम
जिन्दगी हुई इन्ही नामों में तमाम
मर गया "बाबा फ़कीरा" देसी के ठेके पर
दस-दस पव्वे जो लगाये हर नाम पर "

16 टिप्‍पणियां:

  1. बाबा जी महबूबा नही मिली है आजतक़!अब आप ही बताईये किसके गम मरना ठीक रहेगा।पुणे वालों के या मुम्बई के खान साब के या दिल्ली के बेदिल नेताओं के नाम पर मरें?
    मस्त चर्चा ।मज़ा आ गया।

    उत्तर देंहटाएं
  2. जोर दार धांसु चर्चा भाई
    पास आ गयी है होली
    जाग जाओ लोग लुगाई
    हा हा हा

    उत्तर देंहटाएं
  3. aaj to har dil ga rahra valentine day ka gana, koi ek day aisa bhi aaye jab ho rasoi se fursat paana.
    poonam

    उत्तर देंहटाएं
  4. वाह यशवंत जी बहुत खूब बस अब ये जारी रहे और चलती रहे ..टना टन
    अजय कुमार झा

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत ही बढ़िया...मज़ेदार चिट्ठाचर्चा

    उत्तर देंहटाएं
  6. वाह भई बहुत बढ़िया, उम्दा चर्चा किये हो।

    उत्तर देंहटाएं
  7. अरे वाह ! आप की चिटठा चर्चा अनूठी रही , अलग अंदाज़ के लिए शुभकामनायें !

    उत्तर देंहटाएं
  8. लगता है कि महबूबा के गम में ही तो बाबा फकीरा फकीर बने हैं।

    उत्तर देंहटाएं
  9. आप तो बेहतरीन व लाजवाब चिट्ठा चर्चा कार हो गये हो भाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  10. अनूठे अंदाज़ में की गयी चर्चा...अच्छी लगी...ढेर सारी पोस्ट्स से परिचय करवाने का शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं
  11. बढ़िया रही ये चर्चा।
    लेकिन अपना भी लिखते रहो।

    उत्तर देंहटाएं