बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

चलिए आज तस्वीरों की भाषा पढ़ते हैं जो सबक भूल गए हैं उन्हें फिर याद करते हैं ------ (यशवंत मेहता)

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत कुछ कहते यह चित्र प्रभावी हैं.

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  2. हज़ारो शब्द बयाँ.....करती ये तस्वीरे

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  3. वक़्त लगा समझने में...लेकिन जब समझ में आया तो निःशब्द हो गया....

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