गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

सपने जो मेरे हैं उन्हें हाथो में ले ......नहीं तो पांव तले कुचल दे (फ़कीरा)

नसीब में या तो तू हैं या फिर तेरी जुदाई
हाय!!! अगर जुदाई हैं तो मैं जी नहीं पाउँगा
और अगर तू हैं तो ख़ुशी से ही मर जाऊंगा

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इतना कहा मैंने
दो लफ्ज़ जानेमन तू भी बोल दे
सपने जो मेरे हैं उन्हें हाथो में ले
और सीने से लगा अगर मुहब्बत हैं मुझसे
नहीं तो पांव तले कुचल दे 
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9 टिप्‍पणियां:

  1. सीने से लगा अगर मुहब्बत हैं मुझसे
    नहीं तो पांव तले कुचल दे....

    बस ये ही तो उनकी अदा है .. न बोलती हैं .. न कुचलते हैं ...
    बहुत लाजवाब लिखा है ...

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  2. क्या बात है बहुत खूब , आपकी ये रचना सिधे दिल तक उतर गयी ।

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  3. वाह बेटा क्या बात है वैसे नास्वा जी की बात सही है
    शुभकामनायें

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  4. खूब -- बहुत खूब
    जिद हो तो ऐसी

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  5. दिल खोल कर रख दिया भाई। बहुत खूब।

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  6. क्या कहूँ.... हर पंक्ति दिल में उतर गई है....

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  7. क्या बात है………….………!
    जोरदार है। बधाई

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