सोमवार, 15 फ़रवरी 2010

लठंगी लाल का आखिरी सहारा, चुबंन वाले बाबा ---- हंस लो जी भर के यार (यशवन्त मेहता)

एक मशहुर बाबा हुए ----चुबंन  बाबा
हर मर्ज का इलाज चुबंन लेकर कर देते थे
"लठंगी लाल" बाबा के पास गया,
लम्बी लाईन थी वो लग गया
लाईन में लग कर उसने देखा
कोई आता --- बाबा माईग्रेन है....
बाबा सर पर चुबंन लेते, बन्दा जय हो जय हो कहता चला जाता
कोई आता ---- बाबा गठिया है
बाबा जोडो़ पर चुबंन लेते, बन्दा जय हो जय हो कहता चला जाता
अब "लठंगी लाल" का नबंर आया तो वो बाबा के सामने चुपचाप खडा़ हो गया
बाबा बोले --- बोल बेटा, क्या तकलीफ़ है, जो भी होगा हमारे चुबंन से ठीक हो जायेगा
लठंगी लाल फिर भी चुप
बाबा ने फिर पुछा, लठंगी लाल फिर भी चुप
बाबा बोले --- बेटा घबराओ नहीं जो भी तकलीफ़ है बोलो, अभी ठीक कर देगें चुबंन से
लठंगी लाल बोला --- बाबा, बवासीर से परेशान हूँ, सब दर से भटक तेरे दर आया हूँ, अब तू ही इलाज कर

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