शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

वो शराबी...........(फ़कीरा)

बोतल हाथ में लिए
मस्त चाल में चलता
अनजानी सी  बातें करता
अजनबी सवालों के जवाब ढूंढता
कभी मुस्कुराता कभी झल्लाता

तुम यह मत समझना......
.....नशे में चूर...दुनिया से बेखबर...मदहोश हैं वो.....

...नजर सब पर हैं उसकी.....बस जिंदगी को पढ़ कर.......खामोश हैं वो.......

5 टिप्‍पणियां:

  1. मंदिर-मस्जिद बैर कराते,
    मेल कराती मधुशाला...

    फकीरा जी, ये छोटी सी उम्र में बहकी बहकी बातें...माजरा क्या है...

    आपकी पंक्तियों का कुछ हिस्सा काले में घुस जाता है...पढ़ने में ज़ोर लगाना पड़ता है...हो सके तो ठीक कर लीजिए...

    जय हिंद...

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  2. ..बस जिंदगी को पढ़ कर.......खामोश हैं वो....... nice

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