सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

तेरे हुस्न ने मोहब्बत को मेरे दिल का पता दिया -------- (फ़कीरा)

तेरे हुस्न ने मोहब्बत को मेरे दिल का पता दिया 
मेरी उलझी जिन्दगी को तेरी उलफ़त ने सुलझा दिया

तेरी मोहब्बत के आफ़ताब ने हर सुबह को खिला दिया 
मेरी दीवानगी के माहताब ने हर रात को शायराना बना दिया 


रुख से नक़ाब की बेवफ़ाई ने मुझे तेरा दीदार करा दिया
ज़हे-नसीब कि कुदरत ने  फिर इक कोहिनूर बना दिया


तेरी अदा ने शोले को शबनम बना दिया 
इश्क में इमां-ओ-दीं गया , तूने "फ़कीरा" बना दिया

4 टिप्‍पणियां:

  1. ...इश्क में इमां-ओ-दीं गया , तूने "फ़कीरा" बना दिया

    बहुत सुन्दर!

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  2. वाह वाह वाह-तुने फ़कीरा बना दिया।
    लाजवाब रचना-आभार

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