गुरुवार, 25 फ़रवरी 2010

खुशी बांटने से १०० गुणा होकर आप के पास वापस आती हैं --------- यशवन्त मेहता



राजा बलि  को एक  शुभ कर्म के कारण एक दिन के लिये स्वर्ग का सिंहासन मिला. राजा बलि  जब सिंहासन पर बैठे तो उनको एक सन्त की बात याद आयी. सन्त ने कहा था "राजन्‌, अगर तुम अपनी खुशी दुसरों के साथ बाटोगें तो वह १०० गुणा हो कर तुम्हारे पास वापस आयेगी". राजा बलि ने सोचा कि क्यों न ये खुशी सबके साथ बांटी जाये. राजा बलि ने घोषणा करवा दी कि जो भी चाहे वो एक दिन के लिये स्वर्ग में आकर आन्नद भोग सकता है.

 इन्द्र ने जब यह सुना तो वो भागे-भागे राजा बलि के पास गये और बोले "राजन्‌, यह क्या कर रहें हो, यह सुख तुम्हारे लिये है न कि हर किसी के साथ बांटने के लिये". राजा बलि ने कहा " मैं एक दिन के लिये स्वर्ग का राजा हूँ, और मैं यह आन्नद अकेला लूँ या सब पर लुटा दूँ, आप मुझे रोक नहीं सकते"

राजा बलि के आदेशानुसार स्वर्ग के दरवाजें सबके लिये खोल दिये गये. एक दिन बाद सबको स्वर्ग से बाहर निकाला गया. राजा बलि जब बाहर निकल रहें थे तभी आकाशवाणी हुई ---- "राजा बलि, तुमने अपना सुख दुसरों को बांट दिया इसलिये तुमको चक्रवर्ती साम्राज्य का वरदान दिया जाता है, जाओ और उस राज्य पर राज करों"
सो खुशी बाटियें, खुशी बांटने से १०० गुणा होकर आप के पास वापस आती हैं.

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