शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

चुहे ने खेल डाली उनके साथ होली -------(यशवन्त मेहता)






हमारी एक आंटी हैं. उन्हें होली से बहुत डर लगता  हैं. रंग से बचने के लिए वो हर होली पर कहीं छुप जाती हैं. उन्हें खोज पाना बहुत मुस्किल होता था. अब जो छुपेगा उसे रंग पोतने के लिए तो लोग और तैयार रहते हैं. लोग उन्हें खोज ही लेते और फिर गुलाल अबीर से नेहला देते. वो बस गलियां दे कर रह जाती.
 

एक बरस ऐसा हुआ कि वो सुबह-सुबह ही होली के दिन फिर से गायब हो गयी. पतिदेव को सख्त आदेश था कि छुपने वाली जगह का खुलासा नहीं करेंगे. चाहे भांग जितनी चढ़ जाये वो किसी को छुपने वाली जगह नहीं बताएँगे, अगर उन्होंने जगह बताई तो फिर उनकी खैर  नहीं. 


१२-१ के बीच का समय था और होली अपने पूरे रंग पर थी. सभी लोग एक दूसरे को रंग मलने और पकोड़े, दही-भल्ले, मालपुए खाने में व्यस्त थे. तभी आंटी के जोर से चीखने  की आवाज आई . सब लोग उनके घर की तरफ भागे.  आँगन में आंटी खड़ी हुई थी और घरवाले हँसते जा रहे थे. आंटी ऊपर से नीचे तक रंगीन हो रखी थी. अब यह हालत करी तो किसने करी? 


फिर जब आंटी ने आपबीती सुनाई तो सब हँसते-हँसते बेहाल हो गए. आंटी इस बार गोदाम में जाकर छुप गयी थी. उन्होंने जमीन पर चटाई बिछाई और लेट गयी. उनको नींद आ गयी. अचानक उनको टांग पर गुदगुदी सी महसूस हुई और गुदगुदी एक दम से बढ़ गयी. वो तो नाच उठी और उन्होंने पाँव झटके तो साड़ी के अन्दर से चूहा महाराज निकले. चूहे जी उनकी साड़ी में घुस गए थे. वो बुरी तरह से डर गयी और बाहर की तरफ भागी. और इसी आपाधापी में हल्दी, धनिये और आटे इत्यादी के डब्बे उन पर गिर पड़े. 


बेचारी आंटी दिन भर चूहे को गलियां देती रही.



3 टिप्‍पणियां:

  1. मजेदार वाकया. वाकई चूहे ने होली खेल ली
    होली की हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएँ

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  2. होली और मिलाद उन नबी की शुभकामनायें कबूल करें !

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  3. mazedaar raha ye bhi Yashwant..
    इस बार रंग लगाना तो.. ऐसा रंग लगाना.. के ताउम्र ना छूटे..
    ना हिन्दू पहिचाना जाये ना मुसलमाँ.. ऐसा रंग लगाना..
    लहू का रंग तो अन्दर ही रह जाता है.. जब तक पहचाना जाये सड़कों पे बह जाता है..
    कोई बाहर का पक्का रंग लगाना..
    के बस इंसां पहचाना जाये.. ना हिन्दू पहचाना जाये..
    ना मुसलमाँ पहचाना जाये.. बस इंसां पहचाना जाये..
    इस बार.. ऐसा रंग लगाना...
    (और आज पहली बार ब्लॉग पर बुला रहा हूँ.. शायद आपकी भी टांग खींची हो मैंने होली में..)

    होली की उतनी शुभ कामनाएं जितनी मैंने और आपने मिलके भी ना बांटी हों...

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