सोमवार, 8 फ़रवरी 2010

...वो पहली पप्पी बचपन के अनिल कपूर की.....(यशवंत मेहता)....




बचपन मुक्त होता है, चिन्ता से, कोलाहल से। बचपन उन्मुक्त होता है, जैसे जैसे हम बचपन से बाहर निकलते है वो आजादी कहाँ खो जाती है, कोई नहीं जानता। इसी आजादी में दिवाना बन मैं गलियों में टायर घुमाता फ़िरता था, कन्चें खेलता था। एक छ्त से दुसरी छत, पतंग लुटने भागता था। बहुत ऐसे उल्टे-सीधे काम किये। अपना तरीका था, शैतानी ऐसे करो कि शैतान को भी पता चले।

एक बार तरकीब कामयाब हुई। उम्र - साल रही होगी। उस समय मुझे अनिल कपूर और माधुरी बहुत अच्छे लगते थे। अमिताभ की भी कुछ फ़िल्मे उस समय हिट थी पर अमिताभ की उम्र हो रही थी। सलमान, आमिर और शाहरुख नये नये थे। सो अनिल कपूर बेहतर विक्लप थे।

हम अनिल कपूर बन निकल पडे माधुरी की तलाश में। इधर देखा उधर देखा। ननिहाल गया , तो वहाँ खोज करी। माधुरी नही मिली। फिर घर के आसपास देखा, कोई पसन्द नहीं आयी। कुछ को "बहन-बहन" करता फ़िरता था सो उन पर "नजर" डालना "पाप" था।

वो कहते है , बगल में छोरा शहर में ढिंढोरा। अरे मिल गयी पापे। बुधवार का दिन था। उस दिन स्कूल में सफ़ेद ड्रेसकोड होता था। वो सफ़ेद ड्रेस में मुझे सिन्ड्रेला जैसी लगी। हालाकि उसके बाल लम्बे नहीं थे। उसके गालों पर सुर्ख लाल रंग नजर आता था।

मैं उससे बात तो करता ही था। अगले दिन से उसके साथ बैठना शुरु कर दिया। बात आगे बढी। प्यार हो गया। और एक दिन मैने उसे कहा I Love You और दे दी पप्पी। उस समय तो बहुत खुश हुई और मैं भी खुश हो गया।

पर जालिम जमाना, प्यार का दुश्मन। क्लास टीचर "मिस टुनटुन" को ये बात पता चल गयी। सडी हुई मोटी ने ये खबर उसके और मेरे मम्मी-पापा को दे दी। प्रिसिंपल के आफ़िस से बुलावा गया। अगले दिन उसके और मेरे मम्मी-पापा स्कूल आयें।

सबके सामने मेरे से पुछा गया, ऐसा क्यों किया? अबे प्यार के दुश्मनों , प्यार में किया। उत्तर ना दे सका बस रोने लग गया। रोना देखकर उसकी मम्मी पिघल गयी और मुझे प्यार से गले लगा लिया। बात वही खत्म हो गयी। मोटी टुनटुन मेरे लिये सख्त सजा की मांग कर रही थी, पर उसकी बात सुनी गयी। मुझे मीठी से फ़टकार के बाद क्लास में भेज दिया गया।

आज जब उस बात को याद करता हुँ तो खुब हसीं आती है।

5 टिप्‍पणियां:

  1. चलो सस्ते में छूटे वर्ना ---

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  2. ६-७ साल की उम्र में ये गुल तो बाद में तो...!!

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  3. मियां अब बड़े हो गए हो तो ज़रा ध्यान से।

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