मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

चाय ने बनाया हमें सस्ता मेहमान

चाय के बिना तो जीवन अधूरा हैं। एक बार प्रेमिका से जुदा होना मंजूर हैं पर चाय से नहीं। चाय से इतना प्रेम क्यूँ हैं हमें?? चाय ने हमें क्या-क्या नहीं बनाया। हमारे भिन्न चाय वाले रूपों में आज एक रूप आपके सामने रख रहे हैं।

देखिये हम कितने सस्ते मेहमान हैं। अगर आपके घर आयें और आप सिर्फ एक कप गरमागरम चाय पिला दे तो हमारे अन्दर का मठाधीश आपको मालामाल होने का आशीर्वाद देगा। समोसे और कचोड़ियाँ भी चलेंगी अगर आपकी श्रद्धा हो तो। हो तो भी सही हैं परन्तु चाय ८० प्रतिशत दूध और २० प्रतिशत पानी वाली होनी चाहिए। हम चाय वाले महाराज हैं। आपके घर की चाय पीकर हम बता देंगे कि आपका दिल कितना बड़ा हैं। आपके विचार कैसे हैं और आपके मेहमाननवाजी में कितने पारंगत हैं।


अब अगर आपका इरादा इस सस्ते मेहमान को अपने घर बुलाने का हैं तो क्या कहने। हम भी आयेंगे और अपने साथ अपनी कविताओ की गठरी भी लायेंगे। अगर आप कविता सुनने-सुनने के शौक़ीन हैं तो फिर लीटर दूध घर में जरुर रखियेगा। पहले प्याले में जान-पहचान होगी। दुसरे प्याले से कविता पाठ शुरू होगा। कविता पर कविता और चाय पर चाय। पर ध्यान इतना रखा जाये कि कविता और चाय दोनों की अधिकता से हाजमा ख़राब होता हैं।

अब आप कौनसी चायपत्ती का इस्तेमाल करते हैं यह हमारे लिए बहुत महत्तवपूर्ण हैं। हमारा भी एक स्पेशल ब्रांड हैं और हम वही पीते हैं। आपसे गुजारिश हैं की चाय उसी ब्रांड की बनवाये जो हम पीते हैं। हालाँकि हर जगह तो हमारा ब्रांड मिलता नहीं। अगर आप निराश हो गए हैं कि सिर्फ ब्रांड के कारन हम आपके घर चाय पिने नहीं आएंगे तो अपनी चिंता चूल्हे पर चड़ा दीजिये। जो भी चायपत्ती आप इस्तेमाल करते हैं उसी से चाय बना दीजिये। हम भोग लगा लेंगे।

चाय के स्वाद से आपकी अपनेपन का भी हम पता लगा लेंगे। अगर अपनापन कम लगा तो हम दो-चार कप और पीकर देखेंगे। एक कप चाय में अनुमान लगाना सरासर बेईमानी होगी। आपको मौका दिया जायेगा। और हम बता दे कि आपकी चाय में हम अपनापन लाकर ही छोड़ेंगे।

तो हमने तो फरमाइश बता दी। सिर्फ चाय वाले मेहमान हैं हम। तो देर किस बात की। जल्द बुला लीजिये सस्ते मेहमान को।

2 टिप्‍पणियां:

  1. अरे, आप कहाँ इतना परेशान होंगे. हमें तो उसी तरफ काम भी है और कवितायें भी हमारे पास हैं, हम ही आ जायेंगे आपके यहाँ.

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