शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2010

....परदेशी तेरी याद में, बावरी भयी मैं

माटी तुझे पुकार रही
मेरे सईयाँ घर आओ
दिन बीते महीनो में
महीने बीते साल में
एक बार तो जाओ
देखो हम किस हाल में

परदेश गया बालम
परदेशी हो गया
कोई खबर आई
हमसे बेखबर हो गया
पत्तझड़ आंसुओ से हरा हुआ
सावन उदासी से सुख गया


परदेशी तेरी याद में
बावरी भयी मैं
गली-गली भटकूँ तेरी तलाश में
जाने कब जोगन हो गयी मैं

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