गुरुवार, 18 मार्च 2010

पूरी रात कुत्ता मेरा मुहँ चाटता रहा, आलस्य की भी हद हैं



एक ऊट सवार एक गाँव से गुजर रहा था. तभी उसे किसी ने आवाज लगाई. उसने देखा एक पेड़ के नीचे दो आदमी लेते हुए हैं. 
जब वो पास पंहुचा तो उनमे से एक आदमी बोला ---- ऐ भाई सुनो तो जरा!!!!! 
 ऊँठ सवार बोला ---- बताओ क्या बात हैं???
 तो लेटा हुआ आदमी बोला ---- भाई, वहीँ आसमान में ही लटके रहोगे या नीचे भी आओगे??? जरा नीचे उतर कर आओ तो बताये!!!
ऊँठ सवार को लगा शायद बेचारा बीमार हैं , मदद करनी चाहिए. वो उतर कर आया और पुछा ---- हाँ भाई, बोलो क्या बात हैं???
उस आदमी ने कहा ---- ऐ भाई, वो देखो मेरे दाहिनी ओर एक लाल-लाल बेर पड़ा हैं, जरा उठाकर मेरे मुहँ में डाल दो 
ऊँठ वाले ने अपना सर पिट लिया और झल्ला कर बोला ---- कितने आलसी हो, एक बेर उठाकर नहीं खा सकते मुझे इतनी दूर से बुलाया, हद हो गयी आलस्य की!!!!!
यह बात सुनकर बगल में लेता हुआ दूसरा आदमी बोला ------ "अरे महाराज, पूछिए मत यह कितना आलसी हैं, कल रात भर मैं इससे कहता रहा कि कुत्ता मेरा मुहँ चाट रहा हैं जरा उसे भगा दे, इसने एक न सुनी, पूरी रात कुत्ता मेरा मुहँ चाटता रहा, आलस्य की भी हद हैं"

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