बुधवार, 10 मार्च 2010

बोतल में घुसने वालो को फ़लक छोटा ही नजर आता हैं


अब क्या कहें उनको
वो पी कर बहक जाते हैं
मय की खुमारी में
बोतल में घुस जाते हैं 
ख़ुदी से भरे हुए
ख़ुदाई  सिखाते  हैं 
जब बोतल से निकल नहीं पातें
चिल्ला चिल्ला के सबको बोतल में बुलाते हैं
जो बोतल में आ जाये 
तो उसे सबका यार बताते हैं
जो बोतल में न आये 
तो उसे सबका दुश्मन बताते हैं
बोतल में घुसने वालो को फ़लक छोटा ही नजर आता हैं 
जरा बाहर निकल के देखो फ़लक अपनी बाहें कहाँ तक फैलाता हैं 

.......यारों  इशारे करता हैं ख़ुदा सभी की खातिर.......
...... ह़क परस्त ही समझे हैं अब तक ....... शैतानो को कहाँ नजर आते हैं.... ...........
कुछ टुकड़े "फ़कीरा का कोना" पर  

5 टिप्‍पणियां:

  1. kaya bat he guru botal tumahara kaya bigada hai.
    iske hi pichhe pad gye ho
    hane to abhi pahala hi peg halq se niche utara hai.

    bahut sundar kavita abhar

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  2. साँझ ढलते ही वह लम्बी तानेगा
    बोतल में जो नही घुसा
    वह दुनिया को क्या जानेगा.

    सुन्दर रचना लिखा है भाई

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  3. ठीक कहा अपने,इसके आगे इनको कुछ समझ नहीं आता,जब बोतल से निकल नहीं पातें
    चिल्ला चिल्ला के सबको बोतल में बुलाते हैं

    और तब कोई नहीं आता है,अच्छी रचना .

    vikas pandey

    www.विचारो का दर्पण.blogspot.com

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