मंगलवार, 23 मार्च 2010

भगत सिंह की जेल नोटबुक से...........


    शहीदी दिवस पर भारत माता के वीर पुत्रों के चरणों में कोटि-कोटि नमन 


पृष्ट २७ पर लिखे हुए शेर

दिल दे तू इस मिजाज का परवरदिगार दे
जो ग़म की घड़ी को भी ख़ुशी से गुजार दे 
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सजा कर मय्यत-ए-उम्मीद  नाकामी के फूलो से
किसी हमदर्द ने रख दी मेरे टूटे हुए दिल में
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छेड़ न ऐ फ़रिश्ते! तू जिक्र ग़में-जानां
क्यों याद दिलाते हो भुला हुआ अफसाना

5 टिप्‍पणियां:

  1. शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले
    वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा

    भारत माता के वीर पुत्रों के चरणों में कोटिश नमन

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  2. हुए थे वो वतन पे शहीद या कुर्बान हुए थे आज़ादी पे..??
    जूनून था वो मुल्क-परस्ती का या शौक़ था रूह की आज़ादी का..??
    ना मालुम था उन्हें सिला अपनी इस दीवानगी का,
    बका कहूँ इस कहानी को या फना कर दूँ जवानी को..??

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  3. आपके ब्लॉग पर आकर कुछ तसल्ली हुई.ठीक लिखते हो. सफ़र जारी रखें.पूरी तबीयत के साथ लिखते रहें.टिप्पणियों का इन्तजार नहीं करें.वे आयेगी तो अच्छा है.नहीं भी आये तो क्या.हमारा लिखा कभी तो रंग लाएगा. वैसे भी साहित्य अपने मन की खुशी के लिए भी होता रहा है.
    चलता हु.फिर आउंगा.और ब्लोगों का भी सफ़र करके अपनी राय देते रहेंगे तो लोग आपको भी पढ़ते रहेंगे.

    सादर,

    माणिक
    आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से सीधा जुड़ाव साथ ही कई गैर सरकारी मंचों से अनौपचारिक जुड़ाव
    http://apnimaati.blogspot.com



    अपने ब्लॉग / वेबसाइट का मुफ्त में पंजीकरण हेतु यहाँ सफ़र करिएगा.
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