शनिवार, 6 मार्च 2010

सुना हैं खाने से खून बनता हैं, काट डाल और खून चख कर देख ले मैं कौन हूँ???

भूख से बेहाल
वो पंहुचा एक गली
जोर से उसने आवाज लगाई
कोई दो रोटी दे दो भाई

फिर क्या था......दौड़े भागे सब चले आये 

हिन्दू  ने रोटी पकवाई 
मुसलमान ने सब्जी बनवाई
सिक्ख ने रोटी को मक्खन से चुपड़ दिया
ईसाई ने पानी का गिलास सामने रख दिया

और फिर बोले सब प्रेम से ---- जी भर कर खा भाई

सबका प्यार लेकर चला वो आगे की ओर
जंगल था घना आगे ,बसे थे डाकू लुटेरे चोर
 अँधेरा घना था, कदम सहमे हुए थे
चारो तरफ वृक्षों पर कंकाल लटके हुए थे

अचानक कोई सामने आया.........हथियार गले पर लगाया

जिन्दा था या मुर्दा था
मालूम नहीं पर एक दरिंदा था
पुछा उसने तू कौन हैं???

उतर मिला ---- सुना हैं खाने से खून बनता हैं ,काट डाल और खून चख कर देख ले मैं कौन हूँ???

दरिंदा सहम गया
हथियार नीचे हो गया
आँखों से आसुओं का दरिया बह गया 
दिल हल्का हो गया

पैरो में गिर पड़ा और बोला ---- पहचान गया तू एक इन्सान हैं.

 

11 टिप्‍पणियां:

  1. किसके लिये सुना रहे हैं आप. जिनके लिये है वे तो कान बंद कर बैठे हैं. और ऐसा होता नहीं है असल जिन्दगी में.

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  2. सोच गज़ब की,सभी संप्रदायों का मिश्रण है,उस व्यक्ति के अंदर. सही कहा उसने की काट के देख ले मैं कौन हूँ.

    विकास पाण्डेय
    www.विचारो का दर्पण.blogspot.com

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  3. अगर ऐसा सच में हो जाए तो सब यही कहेंगे..."स्वर्ग यहीं है...स्वर्ग यहीं है

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  4. काश इस दुनिया में ऐसे ही लोग होते !!

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  5. बहुत सुंदर... काट डाल और चख ले्... बहुत खूब...

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  6. काट डाल और चख ले्...

    ग़ज़ब की बात लिख दी है भाई ...

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  7. बहुत बढ़िया भावना और स्नेह प्रदर्शन के लिए शुभकामनायें !! शुरुआत जारी रखिये लोग साथ आयेंगे ! प्यार में बहुत शक्ति है !
    शुभकामनायें !!

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  8. ग़ज़ब की सोच के साथ.... सशक्त रचना....

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  9. हिन्दू ने रोटी पकवाई
    मुसलमान ने सब्जी बनवाई
    सिक्ख ने रोटी को मक्खन से चुपड़ दिया
    ईसाई ने पानी का गिलास सामने रख दिया

    और फिर बोले सब प्रेम से ---- जी भर कर खा भाई

    ye panktiyan vishesh taur par pasand aayeen Yashu..
    vaise to sari kavita hi bhavuk karti hai
    Jai Hind...

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