मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

गार्ड और पानी, भैंसे और कारे, मजदुर और नीम का पेड़ ---- दिल्ली की गर्मी

सुबह परीक्षा ने तारे दिखा दिया, भला हो पानी पिलाने वाली आंटी का, तीन घंटे में ८-९ बार चक्कर लगाये और इतनी आत्मीयता से बच्चो को पानी पिला रही थी जैसे अपने बच्चे हो!! मुन्नाभाई ने सिखाया था --- सबको थैंक्यू बोलने का, दिल से!! मुन्नाभाई की बात मानकर धन्यवाद् कहा दिल से!!!

कम्बक्त गर्मी और आसपास नंगी जमीन!!! हरियाली तो बस दिखावे की!!!! १०० पेड़ काट कर १० पेड़ लगा दो, हो गयी पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी पूरी!! बस कंक्रीट के जंगल नजर आते हैं!! विराना छाया हुआ हैं, सूरज आसमान में खड़ा होकर खुल्ला चेलेंज देता हैं --- हिम्मत हैं तो बाहर निकल, लू मार कर न सुला दू तो मेरा नाम नहीं!!

परीक्षा ख़तम होने के बाद बच्चे बाहर निकल रहें हैं!! एक औरत स्कूल के गार्ड से अन्दर जाने के लिए जिद कर रही हैं!! उसे बहुत प्यास लगी हैं पर गार्ड को स्कूल की सुरक्षा की चिंता हैं!! एक लड़का खीज कर बोला --- जाने क्यूँ नहीं देतें, वो किसी उम्मीदवार के साथ ही आई होंगी!! गार्ड कुछ बोला नहीं, जाने दिया!! इतने में एक लड़की बाहर आई तो उसके पापा उससे बोले, बेटा जरा अन्दर से ठंडा पानी तो ले आओ!! बोतल लेकर वो लड़की स्कूल में घुसने लगी तो गार्ड फिर से शुरू हो गया!!
लड़की ने कहा --- शट अप, देखते नहीं कितनी गर्मी हैं, एक बोतल पानी ही तो लेने जा रही हूँ!! मुए गार्ड की शकल देखने लायक थी!!

स्कूल से बाहर निकलकर कुछ दूर चला तो देखा  एक जगह कुछ भैंसे गर्मी से अकुलाई बैठी हैं!! पहले पोखर-तालाब हुआ करते थे, जिनमे बैठकर भैंसे जुगाली किया करती थी!! इन बेजुबानो को भी अब ढूंढे नहीं मिलता होगा कोई पोखर-तालाब!!!  पास में ही एक कारो का शोरूम था जहाँ नयी कारे बाहर रखी हुई थी, उनकी छत पर सूरज चमक रहा था, गोल-गोल , इतराता!!! ये भैंसे थोड़ी हैं जो गर्मी से परेशान हो जाएँगी, इनमे तो एयर कंडीशन लगा हुआ हैं!!


बिल्डिंग बन रही हैं!! दोपहर हो चुकी हैं, मजदुर खाना खाने के लिए बैठे हुए हैं, दो-तीन नीम के पेड़ हैं उन्ही के नीचे चटाई बिछाकर खा रहे हैं!! बातें चल रही हैं, बीड़ी फुकी जा रहीं हैं और गर्दने हिल रही हैं!!! न जाने क्या बात कर रहे हैं!!! इनका एयर कंडीशन तो वो नीम के पेड़ हैं!!!

9 टिप्‍पणियां:

  1. अब तो शहरों में वो नीम के पेड़ भी नही मिलते देखने को .... बहुत अच्छा लिखा है ...

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  2. इनका एयर कंडीशन तो वो नीम के पेड़ हैं!!!
    पर कृत्रिम एयर कंडीशनरो ने तो इन प्राकृतिक एयर कंडीशनरो के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर रखा है
    सुन्दर आलेख
    परीक्षा परिणाम के लिये शुभकामनाएँ

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  3. बहुत अच्‍छा लिखा है लेकिन साइड बार के रूप में आपने जो काली पट्टी लगा रखी है उससे पढ़ने में कठिनाई आती है। उसे ठीक कर लेंगे तो आनन्‍द के साथ पढ़ेंगे नहीं तो कष्‍ट के साथ तो पढ़ ही लेंगे।

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  4. नीम के पेड़ क्या, कोई भी पेड़ मिल जाए, शांति तो मिले

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  5. jansankhya yunhi badhti rahi to ek din wo neem ka ped bhi nahi rahega...
    http://dilkikalam-dileep.blogspot.com/

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  6. mast hai bhai...ekdum mast
    welcome back to blogging..
    All the best for the results..

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  7. सही लिखा है । इस झुलसाने वाली गर्मी में पानी और छाया मिल जाये तो समझो ज़न्नत मिल गई ।
    लेकिन कब तक मिलेंगे ये सब।

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  8. सुन्दर एव्म सरल शब्दो का आलेख...बधाई...

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