बुधवार, 28 अप्रैल 2010

शाम को अच्छे भले बैठे थे चाय पीकर, खटिया पर लुडक गये,

बुड्ढ़े को जवानी छाई
रोम रोम ने  ली अंगड़ाई
दिमाग की बत्ती जलाई
चौक से हेयर डाई मंगवाई
सुबह हुई रंगाई पुताई
दोपहरी में हुई सुखाई

शाम को गली में खटिया लगाई
छम्मकछल्लो को आवाज लगाई 
बहुत दिन हुए हरजाई
आशिक की गली तू न आई

छम्मक छल्लो इतराती चली आई
ओंठ दबाये अदा दिखाई 
बुड्ढ़े ने "फ्लाईंग किस" उड़ाई 
छम्मक छल्लो ने मुट्ठी में दबाई 
"रिटर्न एयर" से वापस लौटाई
बुड्ढा फ़ैल गया "ऑन दी चारपाई"

सुबह बुढ़िया बोली --- शाम को अच्छे भले बैठे थे चाय पीकर, खटिया पर लुडक गये, बच्चे हॉस्पिटल ले गये, डॉक्टर ने बताया हार्ट फेल हो गया  

13 टिप्‍पणियां:

  1. सुबह बुढ़िया बोली ---
    ये तो बताया ही नहीं किससे बोली
    बहुत मजेदार

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  2. हा हा हा
    जरा देख के भाया
    दिल संभाल के
    हथेले पर रखके
    ठेले पे खाट चढाके
    गली में लगा के
    फ़ेर देखियो फ़्लाइंग किस लगा के
    नानी याद आ ज्यागी

    राम राम

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  3. जब जोर का झटका धीरे से लगे तो ऐसा ही होता है।
    शरारती बच्चा !

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  4. लिमिट से बाहर जाने पर यही होगा ।

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  5. अच्छी, रोचक,सबसे जुड़ा रचना ...बढियां..मज़ा आ गया ..

    विकास पाण्डेय

    www.vichrokadarpan.blogspot.com

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  6. मज़ा आ गया ,कहीं पढ़ा था
    "कौन कहता है बुढ़ापे में इश्क का सिलसिला नहीं होता
    आम भी मीठा नहीं होता जब तक कि पिलपिला नहीं होता "

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  7. बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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