बुधवार, 5 मई 2010

सन्नी ओ सन्नी........अरे कलुआ फिर चादर गन्दी कर गया!!!

पीछे साल हमारे घर के आसपास घूमने वाली एक बिल्ली ने एक शावक को जन्म दिया. एक दम काला. काला रंग तो उसके बदन को इतना सुन्दर बना देता था कि अगर कोई हसीना भी सामने अपने काले घने बालो की चादर फैला दे तो भी कवि उस शावक की सुन्दरता का बखान करती कविता लिखेगा. हसीना चली जाएगी पांव पटक कर ---- हम्म, बेवकूफ कहीं का!!!!! उसकी माँ उसे सामने वाली छत पर छोड़कर चली जाती थी. वो कभी लोट पोट होता रहता, कभी कबूतरों को डराता. मेरी मम्मी उसको रोटी का टुकड़ा दूध में भिगोकर फ़ेंक देती थी, जिसे वो पहले तो सूंघकर खाता नहीं था फिर जब भूख लगती थी तो खा पीकर अपने जीब से पंजे साफ़ करने लगता था. कभी आप किसी बिल्ली के बच्चे को खाने के बाद पंजे साफ करते देखिएगा, बड़ा अच्छा लगेगा. गर्मी के दिन थे, इसलिए बिल्ली ने उसको पानी की टंकी के पास रखा हुआ था. जब पानी की टंकी से पानी गिरता था तो वो पानी की धार में पंजे मारता था. हम लोग शाम को उसे देखकर बड़े खुश होते थे.

मम्मी की ममता तो गली के बिल्ली के बच्चो, कुत्ते के बच्चो को देखकर इस तरह जागती हैं कि पूछिए मत. पहले मिट्टी के बर्तन मंगाए जायेंगे फिर उनमे दूध डालकर पिल्लो को पुचकारा जायेगा. अगर नहीं आते तो जबरदस्ती बुलाये जाते हैं. वैसे एक बार दूध दिख जाता हैं तो फिर वही बैठकर चुपचाप पीने लग जाते हैं और पीकर जीब फिरते हैं. हाय तुम्हारी इस अदा पर १०० लीटर दूध कुर्बान.....जियो लाल और खूब लम्बे चौड़े तगड़े होकर गली की रक्षा करो....तुम्हारी भौंक में वो ताकत हो कि अरावली की पठारों में घूमने वाले तेंदुए की जान निकल जायें!!!

अभी कलुआ छलांग नहीं मार पाता था. बिल्ली ने जिस छत पर उसे रख छोड़ा था वो वहां से कहीं जा ही नहीं पाता था. एक दिन वो पानी की टंकी पर चढ़ गया और वहां से सीधे जमीन पर गिर गया. मम्मी ने उसे उठा कर दूध पिलाया और घर में रख लिया. अब उसने तो रोना शुरू कर दिया ---- मऊ मऊ........मऊ मऊ....... बेचारा इतनी पथराई आँखों से देख रहा था कि मम्मी की आँखों में आंसू आ गये. मम्मी ने उसको किसी तरह फिर से छत पर रखवा दिया पर शैतान सिंह फिर गिर गये.
पता नहीं कौन बच्चा उसे उठा कर ले गया. जब बिल्ली आई तो उसने सब जगह ढूंढा, पर वो कहीं मिला नहीं. बच्चे को खोने की व्याकुलता में बिल्ली ३ दिन तक छत पर ही पड़ी रही. न कुछ खाया न पिया बस बार बार मऊ मऊ मऊ करती रही. मम्मी का भी खाना ही रुक गया. ३-४ महीने तक मम्मी भी उसको याद करती रही.

अब पिछले दो-तीन हफ्ते से एक बिलकुल काला जवान बिल्ला हमारे आसपास घूम रहा हैं. हमें पूरा विश्वास हैं की ये वही बिल्ली का बच्चा हैं जो गायब हो गया था. उसने अपनी पहचान के सबूत भी दे दिया. पहले कबूतरों को डराता था पिछले हफ्ते कबूतर को मारकर खा गया. हमारी पूरी छत पर कबूतर के पंख फैले हुए थे, खून की एक एक बूंद चाट गया. खैर ये तो प्रकृति का नियम हैं पर हमने कबूतरों के पानी इस गर्मी रखा ही नहीं. छत पर महाशय पितरो का स्थान भी गन्दा कर गये. पिछले हफ्ते तो छत तक ही थे अब तो घर में भी पहुच बना ली. खुलेआम रसोई पर धावा बोल दिया. मिक्सी गिरा कर चले गये. डस्टबिन की भी जाँच पड़ताल कर डाली. अब चूहे तो हैं नहीं हमारे घर में और दूध रहता हैं फ्रिज में. सो महाशय गुस्से में आ गये हैं. और पिछले तीन दिन में दो बार मेरे कमरे के बेड पर हग कर चले गये हैं. मेरी खुशकिस्मती की मैं वहां सो नहीं रहा पिछले एक हफ्ते से नहीं तो महाशय के कोप का शिकार हो जाता.

पहले ही एक बार बिल्ली जी मुझे परसाद देकर गयी हुई हैं. मैं उस समय 11th  क्लास में था और बाहर वाले कमरे में सोता था, रात को दो-तीन बजे मेरे सर पर भयानक खुजली हुई. मेरी नींद खुल गयी. मेरे सर पर कुछ गिरा हुआ था फिर अचानक से बदबू आई. लाइट जलाकर देखा तो ------- ऊई माँ......मम्मी मम्मी करता भागा.......कम्बक्त सर पर निष्कासन क्रिया करके चली गयी थी. पूरी पेंटीन शेम्पू की बोतल खाली डाली, पूरे एक हफ्ते तक मेरे को वो बदबू सताती रही.

अभी कलुए से डर लग रहा हैं!!!!! कहीं वो भी मुझ पर मेहरबान न हो जाये, और निष्कासन क्रिया भी मेरे ही कमरे में कर रहा हैं सो मैंने तो कमरा ही छोड़ दिया हैं और नीचे सोफे पर सो रहा हूँ. आज सुबह मम्मी ने आवाज दे कर उठाया ----- सन्नी ओ सन्नी........अरे कलुआ फिर चादर गन्दी कर गया!!! अभी दो दिन पहले ही मम्मी ने मेड का हिसाब किताब कर दिया था अब बेचारी खुद मेड बन गयी हैं. फिन्याल डालकर पूरे कमरे की सफाई करनी पड़ रही हैं. वाह रे कलुए....मम्मी ने तुझे इतना प्यार किया.....इसी प्यार का बदला ले रहा हैं तू हग हग कर...........

11 टिप्‍पणियां:

  1. इसी प्यार का बदला ले रहा हैं तू हग हग कर...........
    ये सारे कलुए एक जैसे क्यों होते हैं?
    और इनका बदला लेने का तरीका भी भी एक जैसा।

    कलुए को समझाना की अब ऐसी गलती ना करे
    नहीं तो बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा:)
    वाह भई बहुत अच्छी पोस्ट

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  2. sahi nishkasan kriya ki bhaai.. nahla diya tumhe isi bahane.. mazedaar
    aise hi likhte raho.

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  3. बधाई हो आपको दुबारा मिल गया ।

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  4. हा...हा...हा....बहुत बढ़िया....मजेदार
    किस्सागोई बहुत बढ़िया कर लेते हो यार

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  5. आपने मेरे ब्लॉग पर अपना कीमती समय दिया , इसके लिए धन्यवाद

    आपके इस ब्लॉग पर पहली बार आया हूँ , अच्छा लगा


    http://madhavrai.blogspot.com/

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  6. बहुत सुंदर जी.मजेदार
    धन्यवाद

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