रविवार, 25 जुलाई 2010

सुबह की चाय तेरे हाथो से पीना

सुबह की चाय तेरे हाथो से पीना
भीगे बालो में उलझे मोतियों को तोडना

चादर को फेंक तेरे आँचल को ओढ़ना
मीठी शरारत से तेरे हाथ को मोड़ना

हर दिन तेरी मुस्कान के साथ शुरू करना चाहता हूँ

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खुब.. वाह वाह..

    अपने होठो पर सजाना चाहता हूँ..

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  2. क्या बात है अभी अभी चाय का कप भी हम पी रहे है, सुबह का ओर आप की प्यारी प्यारी कविता का रस भी. धन्यवाद

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