मंगलवार, 24 अगस्त 2010

बड़ा भिखारी

यह एक और शनिवार की रात थी, हमेशा की तरह, राहुल देर रात को आया था. अपने दोस्तों उसे उसकी बस्ती के कोने पर छोड़ दिया! उसने मोबाइल में देखा, ३.३० बज रहे थे!
राहुल ने  दरवाजा खटखटाया. उसके पिता ने दरवाजा खोला!


"तुम ऐसे जगहों पर रूपये क्यों ख़राब करते हो" पिताजी गुस्से में बोले
"ओह, पिताजी, कृपया ... मैं थक गया हूँ., और मैं एक भिखारी नहीं हूँ" राहुल अपने पिता की आपत्ति पर नाराज था.

अगली सुबह,रविवार की सुबह, हमेशा की तरह राहुल 11 बजे तक सो रहा था! किसी ने दरवाजा खटखटाया.
राहुल ने  बालकनी से देखा. एक भिखारी सड़क पर खड़ा था. राहुल ने  एक सिक्का लिया और नीचे चला गया. उसने दरवाजा खोला और भिखारी की हथेली में सिक्का डाल दिया.
सिक्का देते समय उसने भिखारी की आँखों में देखा! उसने दरवाजा बंद कर दिया 

  
उसके अन्दर से आवाज आई " मैं बड़ा भिखारी हूँ"


लघुकथा अंग्रेजी में लिखी गयी थी, मैंने अपने अंग्रेजी ब्लॉग "Thoughts Dhaba" पर सबसे पहली पोस्ट के रूप में इससे प्रस्तुत किया हैं!

8 टिप्‍पणियां:

  1. बढिया प्रस्‍तुति .. रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !

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  2. बहुत बढिया प्रस्‍तुति.. रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाएं !!

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  3. आप को राखी की बधाई और शुभ कामनाएं

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  4. उसके अन्दर से आवाज आई " मैं बड़ा भिखारी हूँ"

    बहुत ही प्रेरणादायक लघु कथा .....

    अंग्रेजी में भी लिखते हैं ....और अब देवनागरी में भी ....स्वागत है .....!!

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