शनिवार, 3 मार्च 2012

दर्द .........

बाहर बालकनी में .........
.....सिगरेट के छल्लो में....
.....काली चाय के घूंटो में....

.....दर्द को भुला देता हूँ मैं.....


अन्दर कमरे में......
.....ऐशट्रे में अधजली सिगरेट बुझाते हुए.....
.....खाली कप टेबल पर रखते हुए....

....दर्द रुला देता हैं मुझे.........

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